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R.O. No. 13952/23
R.O. No. 13952/23

   रायपुर –   प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में शिक्षकों की कमी और असमान पदस्थापना बड़ी चुनौती रही है। सरकार इन स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना के लिए लगातार कदम भी उठा रही है। इसके बावजूद प्रदेश में 2461 स्कूल एकल शिक्षकीय हैं। इसमें सरकारी के साथ ही प्रबंधन के स्कूल भी शामिल हैं।

हालांकि, शिक्षकों और स्कूलों के युक्तियुक्तिकरण से पिछले दो साल में एकल शिक्षकीय 3512 स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। सरकारी दावे के अनुसार राज्य में फिलहाल एक भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। शेष|पेज 9

एकल शिक्षकीय स्कूलों को लेकर कवायद

  • 2023-24 (सुधार से पहले की स्थिति): राज्य में 453 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन थे, जबकि 5,936 शालाएं केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही थीं।
  • 2024-25 व 2025-26 (समायोजन के बाद): सरकारी दावों के अनुसार, सुधार के बाद शिक्षक विहीन स्कूलों की संख्या शून्य हो गई है। वहीं एकल-शिक्षकीय शालाओं की संख्या 2024-25 के 5,973 से घटकर 2025-26 में 2,461 पर पहुंच गई है (यानी 3,512 शालाओं में अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती हुई)।

इस तरह के निर्णय के कारण आई कमी

  • 16 हजार से अधिक तबादले : इस नीति के तहत 16165 शिक्षकों एवं प्राचार्यों का तबादला किया गया और 10,463 स्कूलों का पुनर्गठन किया गया। 14 हजार अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के जरिए सुदूर शालाओं में समायोजित किया गया।
  • युक्तियुक्तकरण नीति : राज्य कैबिनेट ने 9 जुलाई 2024 को युक्तियुक्तकरण नीति को मंजूरी दी, जिसके तहत शहरी क्षेत्रों के अतिशेष शिक्षकों को दूरस्थ व शिक्षक विहीन स्कूलों में भेजने का फैसला लिया गया।

एकल शिक्षकीय, शिक्षक विहीन स्कूलों का डेटा जुटा रही सरकार

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता को लेकर शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने आगामी विभागीय समीक्षा बैठक को देखते हुए प्रदेश के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्तर की एकल-शिक्षकीय और शिक्षक-विहीन शालाओं की जानकारी मांगी है। उप संचालक ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को तय फॉर्मेट में समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

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