कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गुरुद्वारे में झाड़ू लगाई, जूते साफ किए

नईदिल्ली 3 सितम्बर। पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच की तल्खी कम करने की कोशिश में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने खुद एक विवादित बयान दे डाला। बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर उन्होंने कहा कि वो अपने बयान के लिए माफी मांगते हैं। और उसके लिए प्रायश्चित करेंगे। और इसी प्रायश्चित स्वरुप कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने गुरुद्वारे में जूते साफ किए और झाड़ू लगाई। दरअसल हरीश रावत ने कुछ दिनों पहले एक बयान दिया था। इसमें सिखों के पंजे प्यारे की तुलना तुम अपनी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्षों के साथ की थी। श्री रावत के इस बयान को लेकर पंजाब में जबरदस्त बवाल उठा और सोशल मीडिया में इसे सिखों का अपमान बताया जाने लगा। तब हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर मांगते हुए माफी मांगते हुए कहा था कि वे अपनी इस गलती के लिए गुरुद्वारे जाकर प्रायश्चित करेंगे। वहीं खबर यह भी है कि श्री हरीश रावत ने पार्टी आलाकमान से गुजारिश की है कि उन्हें कांग्रेस के पंजाब प्रभारी के पद से मुक्त किया जाए।

बुधवार को अपने फेसबुक पेज पर रावत ने ‘पंज प्यारे’ टिप्पणी के लिए गलती स्वीकार की। रावत ने लिखा, ”कभी कभी सम्मान जाहिर करने के लिए आप ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर जाते हैं जिन पर आपत्ति उठ सकती है। मैंने भी अपने माननीय अध्यक्ष और चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए ‘पंज प्यारे शब्द का इस्तेमाल कर गलती की है।”

रावत ने कहा कि वह देश के इतिहास के छात्र रहे हैं और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा, ”मुझसे यह गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूं।” रावत कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य उत्तराखंड में गुरद्वारे में सफाई कर अपनी इस गलती का प्रायश्चित करेंगे।

रावत ने कहा कि सिख धर्म और इसकी महान परंपराओं के प्रति उनमें हमेशा समर्पण और सम्मान की भावना रही है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने रावत की टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी और इसके लिए माफी की मांग की थी। शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने रावत की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की थी और मांग की थी कि लोगों की भावनाओं को आहत करने के लिए राज्य सरकार को उनके खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए।

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