तेल की बढ़ती कीमतें बिगाड़ सकती हैं अर्थव्यवस्था का संतुलन, RBI ने दी बड़ी चेतावनी!

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका, RBI ने जताई चिंता
नई दिल्ली, 06 जून। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया वृद्धि का असर आने वाले महीनों में आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चेतावनी दी है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) में लगभग 0.36 प्रतिशत यानी 36 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है।मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मई से अब तक पेट्रोल की कीमतों में 7.4 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
परिवहन लागत बढ़ने से महंगे हो सकते हैं जरूरी सामानविशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल महंगे होने पर माल ढुलाई और यातायात की लागत बढ़ जाती है। इससे फल, सब्जियां, अनाज, दूध सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं को बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ता है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ता है। परिणामस्वरूप बाजार में वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
RBI का कहना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने के साथ-साथ अप्रत्यक्ष असर भी दिखाई देगा। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियां अतिरिक्त खर्च का भार ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
उद्योगों पर भी बढ़ेगा दबावकेंद्रीय बैंक ने बताया कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर कमर्शियल एलपीजी, रसायन, रबर, प्लास्टिक तथा अन्य औद्योगिक कच्चे माल पर भी पड़ रहा है। इन उत्पादों का उपयोग विभिन्न उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है। ऐसे में उत्पादन लागत बढ़ने से तैयार उत्पादों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ने की संभावना है।
वैश्विक तनाव बना प्रमुख कारणRBI के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण कच्चे तेल समेत कई कमोडिटी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई को प्रभावित करता है।
रेपो रेट यथावत, विकास दर अनुमान में कटौतीबढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद RBI ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है और अपनी “न्यूट्रल” मौद्रिक नीति को बरकरार रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक विकास दर (GDP Growth) का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। वहीं महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 4.6 प्रतिशत था।
अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक प्रभावRBI का मानना है कि ऊर्जा उत्पादों की ऊंची कीमतें और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है तथा विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में वृद्धि जारी है। इसके बावजूद यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। ऐसे में सरकार, उद्योग जगत और उपभोक्ताओं को बढ़ती लागत और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होगी।
