बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सजा-ए-मौत

ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT-BD) द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर भारत की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत सरकार ने कहा है कि वह इस फैसले को गंभीरता से नोट कर रही है और बांग्लादेश के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि भारत बांग्लादेश में शांति, लोकतंत्र, स्थिरता और समावेशिता बनाए रखने का समर्थन जारी रखेगा।

सरकारी बयान में कहा गया कि भारत एक करीबी पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार के रूप में बांग्लादेश की जनता के कल्याण के लिए हर संभव सहयोग करने को तैयार है। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में सभी पक्षों के बीच रचनात्मक संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि देश में राजनीतिक अस्थिरता न बढ़े और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं मजबूत बनी रहें।

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है। 78 वर्षीय हसीना पिछले साल अपनी सरकार के पतन के बाद से भारत में रह रही हैं। न्यायाधिकरण ने उन्हें पिछले वर्ष जुलाई से अगस्त के बीच हुए छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर “घातक कार्रवाई” का आदेश देने का दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया कि निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, भड़काऊ बयान और कई छात्रों की हत्या के लिए अभियान चलाने की अनुमति में हसीना की भूमिका थी।

रिपोर्टों के अनुसार, ‘जुलाई विद्रोह’ नाम से चले इस आंदोलन में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। इतनी बड़ी संख्या में हुई हिंसा ने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति को झकझोर दिया था और हसीना की सरकार भारी दबाव में आ गई थी। अदालत ने उन्हें पहले ही भगोड़ा घोषित कर दिया था और अब उन्हें मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए दोषी माना गया है।

भारत ने इस फैसले के बाद संयम और संवाद की अपील करते हुए कहा है कि बांग्लादेश की स्थिरता पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत भविष्य में भी बांग्लादेश की जनता और संस्थाओं के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा, ताकि देश में लोकतांत्रिक माहौल सुरक्षित रह सके।

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