डॉ
R.O. No. 13952/23
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  जिम में बॉडी बनाने के लिए युवा प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। आयुर्वेदिक न्यूरोथैरेपी के चिकित्सक वैद्य मनोज शर्मा के अनुसार, सिंथेटिक या मेडिकेटेड प्रोटीन प्राकृतिक आहार की तरह शरीर में अवशोषित नहीं होता। उनका कहना है कि इससे नसों में जमाव होने पर रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और हार्ट अटैक तथा हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ता है। जोड़ों के आसपास रक्त आपूर्ति बाधित होने से कार्टिलेज को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, प्रोटीन पाउडर के नसों में जमने और इससे हार्ट अटैक होने का वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं है। शर्मा अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की ओर से अग्रसेन धाम, छोकरानाला में आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर में पहुंचे थे।

भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि कोविड के उपचार में स्टेरॉयड की अधिक खुराक से कुछ मरीजों के कूल्हे और कंधे के जोड़ों में समस्याएं सामने आई हैं। स्टेरॉयड के अत्यधिक इस्तेमाल से हड्डियों की रक्त आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम भी रहता है।

दादी से सीखी पद्धति, 2015 में सरकारी नौकरी छोड़ी, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पाइन सर्जरी को चुनौती

इस चिकित्सा पद्धति की शुरुआती जानकारी मुझे दादी से मिली। खुद के सर्वाइकल दर्द में राहत मिलने पर इस पर रिसर्च शुरू की। करीब 28 वर्षों से इस पद्धति से उपचार कर रहा हूं। वर्ष 2015 में सरकारी नौकरी छोड़कर इसी क्षेत्र में काम करने का फैसला किया। अब आंख, कान, नाक और गले (ईएनटी) से जुड़ी बीमारियों पर शोध कर रहा हूं। सुनने की क्षमता और आंखों की कुछ समस्याओं के उपचार में भी सफलता मिली है। मेरी थेरेपी में प्रेशर पॉइंट्स के जरिए रीढ़ की खिसकी डिस्क को सही जगह बैठाने, क्षतिग्रस्त कार्टिलेज को दोबारा बनाने और एवैस्कुलर नेक्रोसिस में बाधित रक्त आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाता है। इससे कुछ मरीजों को जॉइंट रिप्लेसमेंट या स्पाइन ऑपरेशन से बचाने की संभावना देखता हूं। हालांकि, इन उपचार परिणामों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक है। मेरे अनुभव में कोविड के बाद हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, पैरालाइसिस और रीढ़ की गंभीर समस्याओं वाले मरीज बढ़े हैं। कोविड संक्रमण, वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभाव और एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक सेवन को लेकर भी अध्ययन की जरूरत है।

सूर्य नमस्कार करें, घुटनों की समस्या में पीछे चलने की सलाह : लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों को शरीर का सही अलाइनमेंट बनाए रखना चाहिए। नियमित सूर्य नमस्कार से रीढ़ और जोड़ों को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। घुटनों के दर्द में पीछे की ओर चलने का अभ्यास भी उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे चिकित्सकीय सलाह और सुरक्षित निगरानी में करना चाहिए। -जैसा कि वैद्य मनोज शर्मा ने बताया।

कैंसर से जूझते हुए खुद पर प्रयोग हर बदलाव डायरी में कर रहे दर्ज

वैद्य मनोज शर्मा स्वयं कैंसर से पीड़ित हैं। उनके मुताबिक, दो बार सर्जरी हो चुकी है और अब वे आगे ऑपरेशन नहीं कराना चाहते। पिछले तीन वर्षों से खानपान, आयुर्वेदिक औषधियों और काढ़े के साथ अपने स्वास्थ्य का अध्ययन कर रहे हैं। इसके लिए चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय जैसे प्राचीन ग्रंथ पढ़ रहे हैं। उपचार के अनुभव और शरीर में होने वाले बदलाव रोज निजी डायरी में दर्ज करते हैं।

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