रायपुर – भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी ने नेताओं और कार्यकर्ताओं की नसीहत देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर एक्टिव रहे, संवाद भी करें लेकिन धरातल पर उतरकर जनसंपर्क बहुत जरूरी है, क्योंकि कभी जमीनी स्पर्श का विकल्प नहीं हो सकता। हमें गांव-गांव, पारा-टोला और बस्तर से लेकर सरगुजा तक जन-जन से सघन संपर्क साधना होगा और लोगों के सुख-दुख में उनकी चौखट पर मजबूती से खड़ा होना होगा। उनकी बात को सुनकर समाधान निकालना ही कार्यकर्ता का सच्चा धर्म है। दो दिन के छत्तीसगढ़ दौरे में प्रदेश प्रभारी ने पार्टी के नेताओं को सभी लोगों को साथ लेकर चलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब कार्यकर्ता जनता के बीच बिना किसी औपचारिकता और सादगी के साथ बैठता है, तब संगठन परिवार बन जाता है। आगामी समय में हमें लोगों के भरोसे को बनाए रखना होगा।
मंत्रियों से नाराजगी पर सवाल, कृषि मंत्री नेताम बोले- नो कमेंट्स
बैठक के बाद मंत्रियों से कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर सवाल किए गए। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने ‘नो कमेंट्स’ कहकर जवाब देने से इनकार कर दिया। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि जिसके पास दायित्व होगा, उससे थोड़ी शिकायत तो होगी ही। कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि मंत्रियों को अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में दौरे बढ़ाने को कहा गया है। पहले भी दौरे होते थे, अब इनकी संख्या और बढ़ेगी। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सभी को साथ लेकर चलने, सरकार को मजबूत करने और सत्ता-संगठन के बीच तालमेल बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। भाजपा कार्यालय में पुलिस की मौजूदगी घटी। इसी दौरान सोमवार की बैठकों में भी केवल सूची में शामिल नेताओं को ही प्रवेश दिया गया।मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की मौजूदगी के बावजूद कार्यालय परिसर में पुलिसकर्मी अपेक्षाकृत कम नजर आए। दरअसल, रविवार को भाजपा कार्यालय में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर स्मृति ईरानी ने नाराजगी जताई थी।
भ्रामक प्रचार करने वाली एजेंसी बनी कांग्रेस : किरणदेव
प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि प्रदेश प्रभारी स्मृति इरानी के दो दिवसीय प्रवास में हम सबको महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला है। संगठन की दृष्टि से यह बेहद ही अहम बैठकें रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह भ्रामक प्रचार करने वाली एजेंसी का रूप ले चुकी है। हमारी बैठकों में क्या हो रहा है, कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने के लिए काल्पनिक कहानियां रच रही है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जिस तरह से भाषायी गरिमा को तार-तार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिता के संदर्भ में जो बातें कहीं उसकी जिसकी निंदा की जाए कम है।
सादगी, संवाद और सघन संपर्क पर जोर… स्मृति के दौरे के बड़े पहलू
1. स्वागत में सादगी, काम पर फोकस: बड़े होर्डिंग्स और ढोल-ताशों के बजाय सीधा बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। इस पहल से स्पष्ट संदेश मिला कि प्राथमिक ध्यान औपचारिक स्वागत की जगह संगठनात्मक संवाद और काम के प्रदर्शन पर है।
2. सहजता का संदेश: पार्टी दफ्तर में भारी सुरक्षा घेरा कम किया गया और ‘मन की बात’ के दौरान सादगी से जमीन पर बैठकर कार्यक्रम सुना गया। यह जनता और कार्यकर्ताओं के बीच यह भरोसा जगाने की कोशिश है कि सत्ता में रहने के बाद भी सहजता और सुलभता ही संगठन का असली आधार है।
3. अनुशासन की मिसाल: मंत्रियों-विधायकों के वाहनों को मुख्य गेट पर रोकना और बिना लाव-लश्कर के पैदल एंट्री। पार्टी दफ्तर के भीतर सभी को समान कार्यकर्ता का दर्जा देकर यह स्थापित किया गया कि संगठन में व्यक्तिगत पद से ज्यादा महत्व व्यवस्था और नियमों का है।
4. बेहतर तालमेल का रोडमैप: दो दिनों में सरकार और संगठन के हर वर्ग के साथ स्मृति ईरानी ने 12 बैठकें की। जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद कायम कर आने वाले समय में सरकारी योजनाओं को ज्यादा प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई।
