तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, मेहनत से हासिल की नई उड़ान

तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास, मिली 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि

जगदलपुर, 5 जून। आर्थिक अभाव और सीमित संसाधनों के बावजूद यदि दृढ़ संकल्प और मेहनत साथ हो, तो सफलता की ऊँचाइयाँ हासिल की जा सकती हैं। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम उलनार की दो होनहार छात्राओं ने अपनी उत्कृष्ट उपलब्धि से इस बात को सिद्ध कर दिया है।

तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से संबंधित रुद्राणी कश्यप और डालेश्वरी बघेल ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर अपने परिवार, गांव और पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। रुद्राणी कश्यप ने सेजेस करपावंड में अध्ययन करते हुए उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, वहीं डालेश्वरी बघेल ने शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल उलनार में शिक्षा ग्रहण कर उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया।दोनों छात्राओं की इस उपलब्धि को सम्मानित करते हुए तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के मेधावी बच्चों के लिए संचालित शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत 15-15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। हाल ही में उलनार में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने छात्राओं को प्रोत्साहन राशि के चेक सौंपे तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

सांसद ने छात्राओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्हें पौधे भी भेंट किए गए और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहकर समाज को प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

रुद्राणी की माता कुंती कश्यप ने बताया कि बेटी की सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि रुद्राणी की विशेष रुचि जीव विज्ञान विषय में है और परिवार उसकी उच्च शिक्षा के लिए हर संभव सहयोग करेगा। वहीं डालेश्वरी के पिता लम्बोदर बघेल ने बेटी की सफलता का श्रेय शिक्षकों के मार्गदर्शन और उसकी मेहनत को दिया।तेंदूपत्ता संग्रहण जैसे श्रमसाध्य कार्य से जुड़े परिवारों की इन बेटियों की उपलब्धि आज क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। शिक्षा प्रोत्साहन योजना से मिली सहायता ने उनके उत्साह को नई ऊर्जा प्रदान की है और उनके सपनों को नई उड़ान दी है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर सफलता का परचम लहराने वाली ये बेटियाँ आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं।

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