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R.O. No. 13952/23
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रायपुर –  शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निपटारे में चार साल से अधिक समय तक हुई देरी को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। विमानन संचालनालय ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से जुड़ा है।

 

चार साल से अधिक समय तक लंबित रहा बीमा दावा

राज्य शासन ने दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर के लिए बीमा दावा प्रस्तुत किया था। सरकार के अनुसार निर्धारित बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया गया था, लेकिन कंपनी ने दावा चार साल से अधिक समय तक लंबित रखा। इसके बाद अगस्त 2026 में कंपनी ने दावा अस्वीकार कर दिया। विमानन संचालनालय ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद इसे सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े दावे के निपटारे में अत्यधिक देरी का मामला माना।

सार्वजनिक धन से जुड़े मामले में जताई गंभीर आपत्ति

शासकीय हेलीकॉप्टर को सार्वजनिक संपत्ति बताते हुए शासन ने कहा कि इसकी खरीद और बीमा में जनता के धन का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे मामलों में बीमा दावे के निपटारे में लंबे समय तक देरी का असर सीधे सरकारी वित्तीय हितों पर पड़ता है। शासन ने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ काम करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों का समयबद्ध तरीके से पालन करना होगा।

नोटिस और सुनवाई के बाद लिया गया फैसला

ब्लैकलिस्ट करने से पहले ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। कंपनी ने अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने तथा उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश जारी करते हुए तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया।

बीमा राशि की वसूली के लिए आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद बीमा दावे का मामला खत्म नहीं हुआ है। राज्य शासन ने कहा है कि वह अपने दावे की राशि की वसूली के लिए आगे भी आवश्यक कार्रवाई जारी रखेगा। शासन के अनुसार सार्वजनिक धन और राज्य के वित्तीय हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी सभी कदम उठाए जाएंगे।

सरकार के इस कदम से यह संकेत दिया गया है कि सार्वजनिक संपत्ति और सरकारी धन से जुड़े मामलों में सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय की जाएगी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत लापरवाही या अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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