रायपुर – राज्य में हुए 554 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले की जांच में एजेंसी ईओडब्ल्यू ने दावा किया है कि कथित वसूली का दायरा कोयले से बढ़कर आयरन ओर तक पहुंचा। जांच के अनुसार, कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के सिंडिकेट ने कोयला कारोबार में प्रति टन 25 रुपए की कथित लेवी से शुरुआत की।
बाद में आयरन ओर (लौह अयस्क) में यही दर बढ़ाकर 100 रुपए प्रति टन कर दी गई। यानी खनिज बदलते ही कथित लेवी की दर चार गुना हो गई। एजेंसी ने सोमवार को मामले में छठा अभियोग पत्र पेश किया है। इसमें दस्तावेज और डायरियां भी जमा की गई हैं।
14 दिसंबर 2021 के प्रस्ताव और 5 जनवरी 2022 में शासन के आदेश के बाद लौह अयस्क, लौह पैलेट और अन्य मुख्य खनिज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के सड़क व रेल परिवहन के लिए पारगमन पास अनिवार्य किया गया। एजेंसी के अनुसार, सिंडिकेट ने इसी व्यवस्था को कथित वसूली के नए माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।
पैलेट निर्माताओं और इस्पात उद्योग से 100 रुपए प्रति टन की दर से रकम वसूले जाने का आरोप है। इसके उलट कोयला कारोबार में 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद ई-परमिट जारी होने से पहले जिला खनिज अधिकारी के मैनुअल अनुमोदन की व्यवस्था लागू की गई।
जांच के अनुसार, कारोबारियों से 25 रुपए प्रति टन की दर से रकम मांगी जाने लगी। रकम नहीं देने पर जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी रोकने और परिवहन प्रभावित करने के आरोप भी जांच में दर्ज हैं।
आयरन ओर की दर ज्यादा, लेकिन कोयले से हुई अधिक वसूली
एजेंसी द्वारा जब्त डायरियों के अनुसार, कोयला परिवहन में कुल 477.56 करोड़ रुपए की रकम दर्ज है। इसमें ‘डीओ कमाई’ के नाम से करीब 238.17 करोड़ रुपए दर्ज बताए गए हैं। वहीं ‘लौह पैलेट’ मद में करीब 36.09 करोड़ रुपए की वसूली दर्ज है। डायरी में दर्ज यह हिसाब संकेत देता है कि कथित वसूली का नेटवर्क केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं था, बल्कि लौह पैलेट और इस्पात उद्योग से जुड़ी गतिविधियां भी इसमें शामिल थीं।
वाशरी और पेट्रोल पंप में निवेश जांच के अनुसार कथित अवैध रकम का इस्तेमाल जमीन और कारोबारी संपत्तियों में निवेश के लिए भी किया गया। रकम से बिलासपुर के बेलतरा और कोरबा के कोथारी स्थित कोल वाशरी, पेट्रोल पंप, राइस मिल और वाहनों में निवेश किए जाने का उल्लेख है।
फार्महाउस, भवन और अन्य निर्माण कार्यों में नकद भुगतान की जानकारी भी दस्तावेजों में दर्ज है। कुछ रकम अलग-अलग फर्मों के खातों में भेजकर उसे असुरक्षित ऋण के रूप में दर्ज करने का भी जांच में दावा किया गया है।
फाइनल चार्जशीट में लगेगा समय
कोल लेवी मामले में 18 जुलाई 2024 को पहली चार्जशीट पेश की गई थी। इसके बाद एजेंसी ने पूरक चार्जशीट पेश की। पहले पूरक चालान में 9 अक्टूबर 2024 को मनीष उपाध्याय और रजनीकांत तिवारी, दूसरे में 7 अक्टूबर 2025 को नवनीत तिवारी और देवेंद्र डडसेना, तीसरे में 15 दिसंबर 2025 को जयचंद कोशले, चौथे में 10 मार्च 2026 को राकेश जैन उर्फ आरके जैन और पांचवें में 20 मई 2026 को नारायण साहू को आरोपी बनाया गया।
कवि सम्मेलन के लिए 25 लाख भुगतान, रिश्तेदारों के नाम संपत्तियां
अभियोग पत्र के अनुसार, कोल लेवी से जुटाई गई कथित अवैध रकम से अधिकारियों, राजनेताओं के परिजनों, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर कई संपत्तियां खरीदी गईं। जांच दस्तावेजों में सौम्या चौरसिया के परिवार से जुड़े शांति देवी चौरसिया और अनुराग चौरसिया के नाम सेवती, पोटिया और हिररी में करीब 47.55 एकड़ जमीन तथा दुर्ग की सूर्या रेसीडेंसी में दो फ्लैट खरीदे जाने का उल्लेख है।
रानू साहू से जुड़े परिजनों के नाम 13 संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी भी दी गई है। दस्तावेजों में सूर्यकांत तिवारी द्वारा रिश्तेदारों और परिचितों के नाम कई जमीनों की रजिस्ट्री कराने का उल्लेख है। वहीं रामगोपाल अग्रवाल से जुड़े वैभव और हर्षित अग्रवाल की कंपनियों के नाम 2021 से 2023 के बीच जमीन खरीदने की जानकारी दी गई है। जांच दस्तावेजों के अनुसार, कवि सम्मेलन के लिए इसी रकम से 25 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
