बेरहम सिस्टम के आगे बेबस 4 अनाथ बच्चियां, सरकारी मदद का है इंतजार

पहले छूटा माता-पिता का साथ, अब दाने-दाने के मोहताज, 4 बेबस बच्चों की यह है कहानी

कोरबा 23 फरवरी। पहले पिता का साथ छूटा और फिर प्रकृति के कहर से मां मौत के मुंह में समा गई. माता-पिता की मौत के बाद अनाथ हुई चार बेटियां अब दाने-दाने को मोहताज है .दरअसल सीतामढ़ी निवासी कलिन्द्री यादव अपने पति की मौत के बाद 4 बच्चों का पालन-पोषण मजदूरी करके कर रही थी. सिम्मी, स्नेहा, मुस्कान, आस्था ने कोरबा कलेक्टर से मिलकर शासन के द्वारा दिए जाने वाले आपदा राशि प्रदान करने की गुहार लगाई है।

पहले पिता का साथ छूटा और फिर प्रकृति के कहर से मां मौत के मुंह में समा गई. माता-पिता की मौत के बाद अनाथ हुई चार बेटियां अब दाने-दाने को मोहताज है . इन मासूमों के सामने जीवन-यापन का ऐसा संकट खड़ा हो गया है जिसे चाहकर हल नहीं कर पा रहें है . चार साल से सरकारी मदद का इंतजार करने की बाद भी जब कुछ नहीं हुआ . तो कलेक्टर के सामने अपना दुख-दर्द बयान किया . अब फाइल फिर से खोली जा रही है देखना है की फाइल से निकल कर मदद कब इन मासूमों तक आ पाती है।

दरअसल सीतामढ़ी निवासी कलिन्द्री यादव अपने पति की मौत के बाद 4 बच्चों का पालन-पोषण मजदूरी करके कर रही थी. 1 अप्रैल 2018 को आंधी-तूफान में घर का छज्जा गिरने से दबकर कलिन्द्री की भी मृत्यु हो गई. मां की मृत्यु के बाद चारों नाबालिक बच्चे अनाथ हो गए। सिम्मी, स्नेहा, मुस्कान, आस्था ने कोरबा कलेक्टर से मिलकर शासन के द्वारा दिए जाने वाले आपदा राशि प्रदान करने की गुहार लगाई है. पीडितों के मुताबिक उन्होंने एक वकील के माध्यम से राहत राशि के लिए कार्यवाही शुरू कराई थी, लेकिन वकील ने भी 3 साल तक मामले को लटकाए रखा. बहरहाल कलेक्टर ने इस संबंध में एसडीएम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे दिया है परंतु अब देखना है कि 5 साल पुराने इस मामले का निराकरण कितनी तेजी से संबंधित विभाग और अधिकारी करते है।

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