अभी भी निर्दोषों को मौत के घाट उतार रहे नक्सली, बकरकट्टा थाना में आधी रात दर्जन भर नक्सली ने किया सरेंडर…

रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की कमर भले ही टूटी गई हो, लेकिन अब भी कई इलाकों में निर्दोषों की जान जा रही है। बीजापुर में नक्सलियों ने एक ठेकेदार की गला रेतकर हत्या कर दी,वहीं दूसरी ओर खैरागढ़ में एक दर्जन से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर कर सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव को साफ कर दिया है।एक तरफ जहाँ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खात्मे के करीब है। तो वहीं, दूसरी तरफ नक्सिलयों के कहर की खबर भी सामने आई है।

बीजापुर के पामेड़ थाना क्षेत्र में नक्सलियों की बर्बरता से इलाके में हड़कंप मचा है। जहाँ सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार इम्तियाज अली को नक्सलियों ने अपहरण कर जंगल में बुलाया और बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। नक्सलियों ने पहले जेसीबी पर काम कर रहे मुंशी को अगवा किया और उसी को चारा बनाकर इम्तियाज को जाल में फंसाया। जैसे ही इम्तियाज अपने मुंशी को छुड़ाने पहुंचा, नक्सलियों ने उसे पकड़ लिया और रास्ते में ही गला रेतकर उसे मौत के हवाले कर दिया।

बताया जा रहा है, कि इम्तियाज अली उत्तर प्रदेश का रहने वाला था, लेकिन काफी समय से वह नारायणपुर के धौड़ाई क्षेत्र में रहकर सड़क निर्माण में कार्य कर रहा था। नक्सली लंबे समय से यहां सड़क और विकास कार्यों का विरोध कर रहे हैं।

कई बार धमकी भरे पोस्टर लगाए गए, लेकिन फिर भी इम्तियाज ने सड़क निर्माण का कार्य जारी रखा। इसी बात से नाराज नक्सलियों ने इम्तियाज की बेरहमी से हत्या कर दी। वही घटना के कुछ घंटे बाद नक्सलियों ने मुंशी को छोड़ दिया गया, जिसने गांव पहुंचकर पूरी वारदात की जानकारी पुलिस को दी।

इधर जहां एक तरफ नक्सली खौफ कायम रखने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके संगठन से बड़े पैमाने पर टूटन भी सामने आ रही है। खैरागढ़ जिले में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और पुनर्वास नीति के असर से नक्सलियों ने बड़ी तादाद में सरेंडर किया है। बकरकट्टा थाना क्षेत्र में आधी रात CC मेंबर रामधेर मज्जी समेत 11 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया जिनमें 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं। सरेंडर करने वाला रामधेर मज्जी नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में शामिल था जिसपर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था।

वही नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। जिसके बाद माना जा रहा है, कि नक्सलियों का MMC जोन लगभग समाप्ति की कगार पर है। एक तरफ नक्सली विकास की राह में बाधा बनकर अपने आतंक कायम करने की कोशिश कर रहे है। तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में हथियार डालने की घटनाएं यह साबित कर रही हैं कि अब नक्सलवाद का किला तेजी से ढह रहा है। दहशत के खिलाफ सुरक्षाबलों की यह लड़ाई अभी जारी है। वही सुरक्षाबलों की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ का हर इलाका शांति और विकास के पथ पर आगे बढ़ सके। ( साभार न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ )

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