फर्जी नियुक्तियों को निरस्त कर वास्तविक पात्रों को रोजगार दिया जाएः भू-विस्थापित संगठन

अब एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी

कोरबा 1 अगस्त। कुसमुंडा खदान क्षेत्र की 1978 से 2004 के बीच अधिग्रहित की गई जमीन के भू-विस्थापित अब अपने हक की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर ले जा चुके हैं। 1000 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो अब तक रोजगार मिला है और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई है। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा बार-बार वादा करने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे विस्थापितों में आक्रोश है।

प्रभावितों ने कहा कि वे अंतिम सांस तक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे और दमन की किसी भी कार्यवाही से डरने वाले नहीं हैं। पूर्व में भी उन्होंने लाठीचार्ज और जेल का सामना किया है, और अब एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसईसीएल प्रबंधन आंदोलन को दबाने के लिए दमनात्मक नीति अपना रहा है। कई आंदोलनकारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया है। हाल ही में कुसमुंडा में एक महिला आंदोलनकारी की गिरफ्तारी ने आंदोलन को और उग्र कर दिया है।

भू-विस्थापित संगठन ने मांग की है कि फर्जी नियुक्तियों को निरस्त कर वास्तविक पात्रों को रोजगार दिया जाए और सभी विस्थापितों को वैकल्पिक रोजगार व पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा और एसईसीएल को अपने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए बाध्य किया जाएगा।

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