रायपुर। बस्तर में नक्सलवाद के दौर से निकलकर मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं की जिंदगी में आए बदलाव की तस्वीर राजधानी रायपुर में देखने को मिली। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों ने कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों में रैंप वॉक किया। रैंप पर महिलाओं का आत्मविश्वास और सभागार में गूंजती तालियां कार्यक्रम के खास पलों में शामिल रहीं।
कभी जंगलों में हथियार के साये में रहने वाली इन महिलाओं ने पहली बार राजधानी के बड़े मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने बड़े मंच पर आने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस अनुभव को खुशी और सम्मान से जोड़ा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh: Former women Naxals, who once carried weapons in the dense forests of Bastar, walked the ramp to huge applause at a National Handloom Day event in Raipur after joining the mainstream. (07.08) pic.twitter.com/51mc8lEXWE
— ANI (@ANI) August 13, 2026
महिलाओं के बयान से सामने आई अलग तस्वीर
कार्यक्रम के बाद इसे लेकर एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि रायपुर लाई गई आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण के नाम पर बुलाया गया था और कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना उन्हें फैशन शो में रैंप पर उतार दिया गया।
हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने अपने बयानों में अलग अनुभव बताया। उन्होंने रायपुर आने और रैंप पर चलने के अवसर को लेकर खुशी जाहिर की। उनके मुताबिक इतना बड़ा मंच उनके लिए एक नया अनुभव था।
ऐसे में कार्यक्रम को लेकर सामने आए अलग-अलग दावों के बीच महिलाओं की अपनी बात भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मंच पर उनकी सक्रिय भागीदारी और रैंप वॉक के दौरान नजर आया उत्साह पूरे घटनाक्रम का दूसरा पक्ष सामने रखता है।
कोसा सिल्क में दिखा हुनर और आत्मविश्वास
प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन में आत्मसमर्पित महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पहचान माने जाने वाले कोसा सिल्क और पारंपरिक हैंडलूम परिधानों को पहनकर रैंप वॉक किया। जैसे ही महिलाएं रैंप पर पहुंचीं, दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
यह प्रस्तुति केवल एक फैशन शो तक सीमित नहीं रही। आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं के लिए यह सार्वजनिक मंच पर अपनी पहचान और आत्मविश्वास दिखाने का अवसर भी बना। बंदूक और हिंसा से दूर अब उनके सामने हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं से किया आत्मीय संवाद
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम के दौरान आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया और उनका उत्साह बढ़ाया। महिलाओं ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे लोगों को सम्मान, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। ऐसे आयोजनों में भागीदारी के जरिए इन महिलाओं को अपनी प्रतिभा और हुनर को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ की तैयारी, कोसा को मिलेगा नया बाजार
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया।
कोसा और पारंपरिक बुनकरी को व्यापक बाजार से जोड़ने की कोशिशों के बीच आत्मसमर्पित महिलाओं की रैंप वॉक ने आयोजन को अलग पहचान दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला, हथकरघा और पुनर्वास के बाद नई जिंदगी की तस्वीर दिखाई दी।
बदलते बस्तर की तस्वीर बनी रैंप वॉक
रायपुर में आत्मसमर्पित महिलाओं का आत्मविश्वास बस्तर में आए बदलाव की एक तस्वीर के रूप में सामने आया। कोसा सिल्क के परिधानों में रैंप पर कदम बढ़ाती महिलाओं ने यह संदेश दिया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने के अवसर मिल सकते हैं।
कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने के बावजूद मंच पर मौजूद महिलाओं की अपनी बात और उनकी सक्रिय भागीदारी ने पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामने रखा। रैंप पर दिखा आत्मविश्वास पुनर्वास के बाद उनके जीवन में आए बदलाव की कहानी कहता नजर आया।

