सर्वे
R.O. No. 13952/23
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  रायपुर –  राजधानी में करीब दस साल बाद शहर में एक-एक मकान की गिनती होगी। इस बार का सर्वे इतना हाईटेक है कि कोई भी मकान संपत्ति कर देने से नहीं बच पाएगा। अभी तक कई बार कमर्शियल को आवासीय और जहां निर्माण हो चुका है उसे खाली प्लॉट बताकर संपत्ति कर में चोरी की जा रही है। लेकिन अब इस तरह के सभी फर्जीवाड़े बंद होंगे।

अगले वित्तीय साल यानी 2027-28 में एक भी मकान ऐसा नहीं होगा जिससे टैक्स न वसूला जा सके। टैक्स चोरी के मामले पूरी तरह से खत्म होंगे। जो पात्र लोग हैं उन्हें टैक्स देना ही होगा। क्योंकि शहर की संपत्तियों का अब लिडार सर्वे होने जा रहा है।

इसके लिए जारी टेंडर में तीन एजेंसियां शामिल हुई हैं। निविदा समिति इनका चयन कर इसकी जानकारी एमआईसी को देगी। जिसके बाद शहर में सर्वे का काम शुरू होगा। इस पर 5 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

इसमें सभी संपत्तियों की थ्रीडी फोटोग्राफी, लोकेशन, आवासीय, व्यावसायिक, नंबरिंग जैसी सभी जानकारियों का डेटाबेस एक ही जगह पर एकत्रित किया जाएगा। पिछले 10 साल में शहर में लगातार आबादी बढ़ने के साथ ही मकानों की संख्या भी बढ़ी है। इसका रिकॉर्ड डिजिटल तौर पर मेंटेन करने के लिए ही यह सर्वे किया जा रहा है।

 

  • टेंडर में तीन एजेंसियां शामिल, इसे एमआईसी में भेजेंगे, 5 करोड़ खर्च होंगे
  • संपत्तियों की थ्रीडी फोटोग्राफी और लोकेशन जैसी जानकारियां इकट्ठा करेंगे

जानिए... क्या है आधुनिक लिडार सर्वे

लिडार (LIDAR) एक उन्नत रिमोट सेंसिंग तकनीक है, जिसमें लेजर किरणों की मदद से किसी क्षेत्र या वस्तु का सटीक थ्रीडी मॉडल तैयार किया जाता है। इसमें लेजर पल्स धरातल या वस्तुओं पर भेजी जाती हैं और उनके वापस लौटने में लगे समय से दूरी मापी जाती है। यह तकनीक जमीन, इमारतों, पेड़ों, सड़कों आदि का वास्तविक डिजिटल मॉडल तैयार करती है।

550 करोड़ तक की वसूली

निगम अफसरों का दावा है कि अभी शहर में कुल 3.60 लाख प्रॉपर्टी है। इसमें 3.48 लाख से ही टैक्स वसूला जा रहा है। 2025-26 में निगम को संपत्ति कर से 330 करोड़ मिले थे। इस बार 2026-27 में 475 करोड़ का टारगेट तय किया गया है। लेकिन लिडार सर्वे के बाद संपत्ति कर 550 करोड़ मिलने की उम्मीद है।

कार्रवाई हो सकेगी

शहर में कई ऐसी संपत्तियां भी हैं जिनकी अनुमति और टैक्स आवासीय के लिए है, लेकिन इनका उपयोग कमर्शियल के तौर पर किया जा रहा है। ऐसी संपत्तियों की पहचान लिडार सर्वे से होगी। निगम इस पर कार्रवाई करते हुए नया टैक्स तय करेगा। इन सभी को डिमांड नोटिस जारी किया जाएगा।

भास्कर एक्सपर्ट – सौरभ रहटगांवकर, अध्यक्ष, आर्किटेक्ट एसोसिएशन

सूडा ने कराया था सर्वे अब नए सर्वे की जरूरत

रायपुर में लिडार सर्वे के पहले सूडा वालों ने शहर का जीआईएस सर्वे कराया थे। क्योंकि शहर में जितने मकान हैं उतने का टैक्स नहीं आ रहा है। इस सर्वे के बाद मकानों की संख्या और संपत्ति कर का राजस्व दोनों बढ़े था। अब एक बार फिर शहर के मकानों का सर्वे कराने की जरूरत है।

क्योंकि टैक्स देने वाले मकानों की संख्या फिर बढ़ गई है। मकानों के साइज और संपत्ति कर का सटीक आकलन करने के लिए नए सर्वे की जरूरत है। इसलिए अब नई हाईटेक तकनीक लिडार सर्वे से मकानों की पहचान की जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिन संपत्तियों से अब तक टैक्स नहीं मिल रहा है उनसे भी टैक्स मिलना शुरू हो जाएगा।

जल्द फाइनल होगी एजेंसी

लिडार सर्वे करने के लिए 3 कंपनियां सामने आई हैं। पांच करोड़ के इस टेंडर की जांच निविदा समिति करेगी। इसके बाद इसे एमआईसी में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद शहर में सर्वे शुरू हो जाएगा। -लोकेश्वर साहू, अपर आयुक्त, नगर निगम

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