कोरबा वनमण्डल में निगरानी व्यवस्था में लापरवाहीः लकड़ी तस्कर सक्रिय, सागौन के 26 लट्ठे से भरी पिकअप पकड़ाए

कोरबा 17 अगस्त। भुलसीडीह जंगल से सागौन के 26 लट्ठों से भरी पिकअप पकड़े जाने के बाद वन विभाग अपनी कार्रवाई को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रहा है, लेकिन इस कार्रवाई ने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन विभाग के मुताबिक पिकअप से करीब 2 घन मीटर सागौन की लकड़ी बरामद हुई है, जिसकी कीमत लगभग 85 हजार रुपये बताई गई है। सवाल यह है कि यदि जंगल में सागौन के पेड़ों की कटाई कर लकड़ी तैयार की जा रही थी और उसे वाहन में लादकर वन मार्ग से बाहर ले जाया जा रहा था, तो पेड़ों की कटाई के दौरान वन अमला कहां था?

रात में पिकअप पकड़ लेना कार्रवाई का एक हिस्सा जरूर है, लेकिन असली सवाल यह है कि सागौन के पेड़ किस स्थान से काटे गए, कितने पेड़ काटे गए और इस पूरी गतिविधि में कौन-कौन लोग शामिल थे? क्या विभाग ने सिर्फ वाहन और लकड़ी जब्त कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है या कटाई के मूल स्रोत तक भी जांच पहुंचेगी?

वन विभाग लंबे समय से जंगलों की सुरक्षा, अवैध कटाई रोकने और नियमित गश्त के दावे करता रहा है। इसके बावजूद यदि जंगल से सागौन काटकर लट्ठे तैयार किए गए और फिर उन्हें पिकअप में लादकर बाहर ले जाने की नौबत आ गई, तो वन सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जंगलों में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए जिम्मेदार तंत्र को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी? अगर सूचना मिलने के बाद ही गश्त बढ़ाकर वाहन पकड़ा गया, तो क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था सूचना तंत्र पर ही निर्भर है?

वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच केवल जब्त लकड़ी और वाहन तक सीमित रहती है या फिर सागौन कटाई के पीछे सक्रिय नेटवर्क, लकड़ी के वास्तविक स्रोत और जिम्मेदार लोगों तक भी कार्रवाई की आंच पहुंचती है। सिर्फ पिकअप पकड़ना पर्याप्त नहीं, जंगल में खड़े सागौन के पेड़ों की सुरक्षा का हिसाब भी विभाग को देना होगा।

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