संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से होगा शुरू, 13 अगस्त तक चलेगा: किरेन रिजिजू

0-महंगाई, बेरोजगारी, नीट, चुनावी सूची पुनरीक्षण और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली (आरएनएस)। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को मानसून सत्र-2026 के लिए बुलाने की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस अवधि में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
मानसून सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक प्रकरण, राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं तथा चुनावी सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। इसके अलावा विपक्ष क्षेत्रीय दलों में टूट-फूट और राजनीतिक दल-बदल के मामलों को भी सदन में उठाने की तैयारी कर रहा है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल और असम में चुनावी सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) भी संसद में आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। सरकार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है।
सरकार के विधायी एजेंडे में महिला आरक्षण तथा परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक प्रमुख माने जा रहे हैं। इसके अलावा संविधान (130वां संशोधन) विधेयक भी संसद में पेश किया जा सकता है। वर्तमान में यह विधेयक संयुक्त संसदीय समिति के विचाराधीन है।
इसके साथ ही विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, कंपनी कानून में सुधार तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक भी संसद में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।
गौरतलब है कि राजग सरकार के लिए पिछला संसदीय सत्र अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। वर्ष 2029 से महिलाओं के लिए विधायिका में आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित नहीं हो सका था।
इसी कारण सरकार अब इस विधेयक का नया प्रारूप तैयार कर रही है। प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक समान रूप से बढ़ाई जा सकती है। हालांकि आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण का विषय लंबे समय से दक्षिण भारत के राज्यों और वहां की राजनीतिक पार्टियों के लिए चिंता का कारण रहा है। ऐसे में सरकार संतुलित व्यवस्था के साथ नया प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है।
संसद के आगामी मानसून सत्र में जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम करेगा। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण और संभावित रूप से हंगामेदार रहने की संभावना है।

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