रायपुर, 18 सितंबर 2026। सरगुजा की पूजा सिंह के लिए डॉक्टर बनना महज एक सपना नहीं, बल्कि मुश्किल हालात के बीच जारी चार साल की जिद और मेहनत का परिणाम है। परिवार की आर्थिक तंगी, महंगी कोचिंग से दूरी और 66 प्रतिशत दिव्यांगता भी पूजा के हौसले को नहीं तोड़ सकी। ग्राम राधापुर की इस आदिवासी बेटी ने घर पर रहकर चार वर्षों तक NEET की तैयारी की और आखिरकार NEET-2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त कर लिया।
पूजा की मेडिकल शिक्षा आर्थिक संकट के कारण प्रभावित न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत की है।
मां दूसरों के खेत में मजदूरी करती रही, बेटी किताबों से भविष्य लिखती रही
पूजा सीतापुर विकासखंड के ग्राम राधापुर की निवासी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। उनके पिता चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहते हैं। ऐसे में पूजा की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर रही। मां के पास खुद की कृषि भूमि नहीं है और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती है।
आमदनी सीमित थी, लेकिन बेटी के सपनों में कमी नहीं आने दी गई। मां मेहनत करती रहीं और पूजा अपनी पढ़ाई में जुटी रहीं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद परिवार ने पूजा के डॉक्टर बनने के लक्ष्य को टूटने नहीं दिया।
2022 में 12वीं पास की, फिर घर को ही बना लिया तैयारी का केंद्र
पूजा ने शुरुआती और पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्राम राधापुर में हासिल की। इसके बाद शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 में 12वीं पास करने के बाद उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की।
बड़े शहर में जाकर कोचिंग करना परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण संभव नहीं था। पूजा ने इसका रास्ता भी खुद निकाला। उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक चार वर्षों तक घर पर रहकर NEET की तैयारी जारी रखी। 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने लगातार अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।
चार साल की मेहनत ने दिलाया मेडिकल कॉलेज में प्रवेश
लगातार प्रयास के बाद वर्ष 2026 में पूजा को सफलता मिली। उन्होंने NEET परीक्षा पास की और काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश हासिल किया। सीमित संसाधनों वाले परिवार से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना पूजा और उनकी मां के लिए बड़ी उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री की पहल से पढ़ाई के खर्च का मिला सहारा
पूजा की पारिवारिक परिस्थितियों और NEET में मिली सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उनकी मेडिकल शिक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद जिला प्रशासन ने DMF मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2.50 लाख रुपये स्वीकृत किए।
कलेक्टर अजीत वसंत ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बीच पूजा ने जिस मेहनत और आत्मविश्वास के साथ सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है।
पूजा की कहानी कहती है—संसाधन कम हों तो भी सपने बड़े हो सकते हैं
पूजा की कहानी में आर्थिक अभाव है, दिव्यांगता की चुनौती है और लंबे इंतजार के बाद मिली सफलता भी है। चार वर्षों तक घर पर रहकर तैयारी करने वाली पूजा ने दिखाया कि महंगी कोचिंग या बड़े शहर की सुविधाएं न होने के बावजूद लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
मां की मजदूरी, बेटी की मेहनत और अब शासन का सहयोग—पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को तीन मजबूत सहारे मिल गए हैं। मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू होने के साथ अब पूजा के सामने अपने उस लक्ष्य को पूरा करने का रास्ता खुल गया है, जिसके लिए उन्होंने चार साल तक लगातार मेहनत की।

