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R.O. No. 13952/23
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बिलासपुर –   बिलासपुर साइबर पुलिस ने च्वाइस सेंटरों के QR कोड का दुरुपयोग कर ठगी करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के 9 जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों से 20 से 25 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1 लाख 2 हजार रुपए कैश, वारदात में इस्तेमाल की गई एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल जब्त किए हैं।

परेशान च्वाइस सेंटर संचालकों ने मामले की शिकायत रेंज साइबर थाने में की है।
परेशान च्वाइस सेंटर संचालकों ने मामले की शिकायत रेंज साइबर थाने में की है।

फोन-पे की रकम के बदले कैश देने का झांसा

 

पुलिस के मुताबिक, बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से सेंटर पहुंचा। उसने फोन-पे से आए ट्रांजैक्शन के बदले कैश देने की बात कही। संचालक के सहमत होने पर उसने QR कोड का फोटो अपने मोबाइल में लिया और वहां से चला गया।

इसके बाद QR कोड के जरिए 16 हजार रुपए का ट्रांजैक्शन किया गया और संचालक को नकद रकम दे दी गई। अगले दिन बैंक खाते पर होल्ड लगने के बाद पता चला कि खाते में आई रकम साइबर फ्रॉड से जुड़ी है। इसके बाद संचालक को दूसरे च्वाइस सेंटर संचालकों के साथ भी इसी तरह की धोखाधड़ी होने की जानकारी मिली।

 

एक आरोपी QR कोड भेजता, दूसरा रकम ट्रांसफर करता

 

मामले की जांच के दौरान रेंज साइबर बिलासपुर की टीम को अंकित आहूजा (32), निवासी कमल विहार, रायपुर के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने उसे हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा वारदात करने की कोशिश के दौरान पकड़ा। पूछताछ में उसने अपने साथी आशीष केवटवानी (32), निवासी महावीर नगर, तेलीबांधा, रायपुर के साथ मिलकर ठगी करना स्वीकार किया।

पुलिस के अनुसार, अंकित अलग-अलग च्वाइस और सीएससी सेंटरों में जाकर QR कोड की फोटो अपने मोबाइल से आशीष को भेजता था। आशीष QR कोड स्कैन कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि अंकित संचालकों से उसके बदले नकदी लेकर निकल जाता था। बाद में जब संचालकों के बैंक खाते होल्ड हुए, तब उन्हें रकम के साइबर फ्रॉड से जुड़े होने की जानकारी मिली।

 

जानिए क्या बोले च्वाइस सेंटर संचालक ?

 

हिर्री क्षेत्र के खरकेना निवासी देवेंद्र रजक बिल्हा मोड़ पर लक्ष्मी च्वाइस सेंटर चलाता है। 5 अक्टूबर को नीले रंग की एक्टिवा से एक युवक उनके सेंटर पहुंचा। उसने देवेंद्र से खाते में ऑनलाइन रुपए मंगवाकर कैश देने को कहा। इसके बदले कमीशन देने की बात कही।

देवेंद्र के सहमत होने पर युवक ने दुकान का क्यूआर कोड मोबाइल से खींचकर किसी अन्य व्यक्ति को भेज दिया। कुछ ही देर में देवेंद्र के खाते में 16 हजार रुपए आ गए। उन्होंने 150 रुपए सर्विस चार्ज काटकर बाकी रकम युवक को कैश दे दिए।

 

साइबर ठगी की रकम जमा होने पर अकाउंट होल्ड

 

अगले दिन एसबीआई की चकरभाठा शाखा से देवेंद्र को पता चला कि, खाते में फ्रॉड की रकम आने के कारण उसे फ्रीज कर दिया गया है। इसी तरह आरोपी ने राकेश कौशिक (हिर्री), राकेश साहू (जरौंधा), छत्रपाल गेन्ड्रे (उस्लापुर), दीपक वस्त्रकार (परसदा), राहुल साहू (जरेली), आकाश पालीवाल (रतनपुर) और भूपेंद्र सिंह (कोटा) के खातों में भी रकम ट्रांसफर कराई और उनसे नकद रुपए ले लिए।

 

9 जिलों में फैला था नेटवर्क, 45 पीड़ित सामने आए

 

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को भी निशाना बनाया। अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन मिले हैं। इनके आधार पर धोखाधड़ी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपए आंकी गई है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत कार्रवाई की है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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