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R.O. No. 13952/23
R.O. No. 13952/23

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बहुचर्चित मां-बेटी हत्याकांड में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में मुख्य दोषी कुलदीप साहू समेत तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है, जबकि चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा को आजीवन कारावास दिया गया है। इस मामले में अदालत ने अपराध की क्रूरता और सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिए जाने को गंभीरता से लिया।

पुलिसकर्मी से विवाद के बाद खूनी वारदात

अभियोजन के अनुसार, कुलदीप साहू का प्रधान आरक्षक तालिब शेख से पुराना विवाद था। 13 अक्टूबर 2024 को विवाद ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि कुलदीप ने बस स्टैंड के पास एक पुलिसकर्मी पर खौलता हुआ तेल फेंका और पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने का प्रयास किया। इसके बाद वह अपने साथियों के साथ प्रधान आरक्षक के घर पहुंचा, जहां उसकी पत्नी और बेटी की निर्मम हत्या कर दी गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई क्रूरता

मामले की जांच के दौरान सामने आए पोस्टमार्टम निष्कर्षों के अनुसार, मां और बेटी के शरीर पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे। रिपोर्ट में पत्नी के शरीर पर 37 और नाबालिग बेटी के शरीर पर 28 वार के निशान होने का उल्लेख किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वारदात के दौरान महिला के साथ दुष्कर्म भी किया गया। हत्या के बाद दोनों के शव पीढ़ा गांव में फेंक दिए गए थे।

चार दोषियों को सजा, दो आरोपित दोषमुक्त

अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चार आरोपितों को दोषी ठहराया। इनमें कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह और चंद्रकांत चौधरी को मृत्युदंड सुनाया गया, जबकि आर्यन विश्वकर्मा को आजीवन कारावास की सजा दी गई। वहीं, दो अन्य आरोपितों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया था।

इस फैसले के साथ छत्तीसगढ़ के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक में महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय सामने आया है। मृत्युदंड के मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

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