रावलपिंडी में 100 साल पुराने “मंदिर” पर हमला

इस्लामाबाद 30 मार्च: पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में 100 साल से भी अधिक पुराने एक हिंदू मंदिर पर अज्ञात लोगों के एक समूह ने हमला किया है। पुलिस को मिली शिकायत में यह बात कही गई है।

इस मंदिर के नवीकरण का काम चल रहा है। शिकायत के अनुसार शहर के पुराना किला इलाके में शनिवार शाम साढ़े सात बजे 10 से 15 लोगों के समूह ने मंदिर पर हमला किया और ऊपरी मंजिल के मुख्य द्वार तथा एक अन्य दरवाजे के साथ-साथ सीढ़ियां भी तोड़ दीं।

‘डॉन’ समाचार पत्र के अनुसार इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETBE) उत्तरी जोन के सुरक्षा अधिकारी सैयद रजा अब्बास जैदी ने रावलपिंडी के बन्नी थाने में शिकायत दी, जिसमें बताया गया है कि पिछले एक महीने से मंदिर के निर्माण और नवीनीकरण का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर के सामने कुछ अतिक्रमण किया गया था, जिसे 24 मार्च को हटा दिया गया।

जानकारी के अनुसार 74 साल बाद मंदिर में धार्मिक गतिविधियां और पूजा चालू होने वाली थी। मंदिर और उसकी पवित्रता को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले, अतिक्रमण करने वालों ने मंदिर के आसपास दुकानें और पटरियां बनाकर काफी लंबे समय से कब्जा कर रखा था।

जिला प्रशासन ने पुलिस की मदद से हाल ही में सभी तरह का अतिक्रमण हटा दिया। मंदिर को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने के बाद नवीनीकरण का काम शुरू हुआ था। इस बीच, मंदिर के प्रशासक ओम प्रकाश ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि सूचना मिलते ही रावलपिंडी के पुलिस कर्मी वहां पहुंचे और हालात पर काबू किया। पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों में किया गया यह कोई पहला हमला नहीं है। इस्लामिक देश पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों पर हमले होना और उन्हें नष्ट किया जाना आम घटना की तरह ही है। भीमपुरा, कराची में एक प्राचीन हिन्दू मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था और देवी-देवताओं की मूर्तियों को बाहर फेंक दिया गया था।

पाकिस्तान में इससे पहले अक्टूबर 2020 में सिंध के बदीन में हिन्दू मंदिर में तोड़-फोड़ की घटना की जानकारी सामने आई थी जिसमें मोहम्मद इस्माइल शैदी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था।

पिछले वर्ष ही खैबरपख्तूनख्वा के करक जिले में सैकड़ों लोगों ने एक हिन्दू मंदिर को आग के हवाले कर दिया था। इस मामले में 350 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी जिसमें जमीयत उलेमा-ए-इस्लामी के नेता रहमत खटक का नाम भी था। इस घटना के बाद इमरान खान की बहुत आलोचना हुई थी।

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