पुलिस की वर्दी पहन कर लोगो से ठगी करने वाला गिरफतार

कोरबा 14 मार्च। पुलिस की वर्दी पहन कर वह खुद को आरक्षक बताते हुए न केवल झूठा धौंस दिखाता रहा, बल्कि एक पिता से उसके पुत्र को पुलिस हिरासत से छुड़ा लेने का झांसा देकर दस हजार रूपये भी ऐंठ लिए। रूपये लेने के बाद आरोपित वापस नहीं लौटा, तब पिता ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि उसका बेटा जेल में बंद है।

ग्राम कचोरा निवासी प्रेमदास हत्या के मामले में जिला जेल में बंद है। उसके पिता शिवदास एक सप्ताह पहले गांव में ही देवागंन के निर्माणाधीन मकान में काम कर रहा था, इस दौरान एक पुलिस कर्मी वर्दी में आया और खुद को आरक्षक बताते बोला कि तुम्हारा बेटा प्रेमदास जेल से भाग गया है और चांपा में पकडा गया है, तुम 10 हजार रूपये दो, तो तुम्हारे बेटे को छोडवा दूंगा। उस पर विश्वास करते हुए उसने 10 हजार रूपये दे दिये और उसके साथ चांपा रेल्वे स्टेशन तक गया। यहां स्टेशन के सामने खुद को आरक्षक बताने वाला लड़का उसे बाहर ही इंतजार करने की बात कह कर स्टेशन के अंदर चला गया, फिर वापस नहीं लौटा। खोजबीन करने के बाद भी नहीं मिलने पर शिवदास वापस घर लौट गया। दूसरे दिन सुबह जिला जेल कोरबा गया और अपने बेटे के बारे में जानकारी लिया तो पता चला वह जेल में ही है। वह समझ गया कि किसी ने उसे ठगा है। इस घटना की शिकायत उरगा थाने में उसने की। पुलिस ने उससे दोबारा संपर्क करने पर सूचना देने की बात कही थी। इस बीच शिवदास से मिलने फर्जी आरक्षक एक बार फिर उसके घर पहुंचा और पुनः पैसा मांगने लगा। इसकी सूचना मोबाइल पर शिवदास ने उरगा पुलिस को दे दी। आरोपित भी स्थिति भांप कर पुलिस के पहुंचने से पहले भाग गया। पुलिस की टीम ने पीछा करते हुए चांपा में उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम रविदास महंत उर्फ कबीर कंवर पिता गोविंद दास महंत 22 वर्ष निवासी महुआडीह भिलाईबाजार थाना कुसमुंडा बताया। इसके साथ ही उसने दस हजार ठगने की बात स्वीकार कर ली है। उसके पास से पुलिस की वर्दी व पांच सौ रूपए जब्त किया गया। ठगे गए रूपये उसने खर्च कर देने के बात कही है। पुलिस ने धारा 170, 171, 419, 420, 49 पुलिस अधिनियम के तहत आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करते हुए न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

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