कोरबा: नगर निगम का हीटर, नहीं कर रहा हिट; अलाव जलाने मजबूर हो रहे नागरिक

कोरबा नगर निगम में कहीं हीटर घोटाला तो नहीं हो गया.?

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा ने ठंड से बचाव के लिए पुलिस थानों से लेकर आम नागरिकों तक के लिए हीटर खरीद कर वितरण किया है। लेकिन ये हीटर हिट ही नहीं कर रहे, जिसके चलते ठंड से बचने के लिए नागरिकों को अलाव का सहारा लेने मजबूर होना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार नगर निगम ने ठंड से नगर वासियों को बचाने के लिए लाखों रुपयों के हीटर की खरीदी की है। हीटर खरीदने के बाद नगर निगम क्षेत्र में अनेक स्थानों पर नागरिकों को हीटर वितरण किया गया है। लेकिन ये हीटर प्रभावहीन हैं। ये हिट ही नहीं कर रहे। पुराना बस स्टैंड कोरबा मानक ऐसा ही हीटर दिया गया है। यहां लोगों को हीटर चालू करने पर कोई राहत ही नहीं मिलती। लिहाजा वे लकड़ी खरीदकर अलाव जला रहे हैं।

इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में अन्य स्थानों में दिए गए इलेक्ट्रिक हीटर का भी यही हाल है। लोगों ने बताया कि हीटर अत्यधिक घटिया दर्जे का है। उन्होंने संदेह जताया कि संभवतः ये हीटर चीन निर्मित हैं। चीन के उत्पाद सस्ते तो होते हैं लेकिन वे गुणवत्ताहीन भी होते है। लोगों का कहना है कि हीटर खरीदी और इसकी गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और इनकी खरीदी किस प्रक्रिया से और किस दर से की गई है? इसका सार्वजनिक रूप से खुलासा किया जाना चाहिए। साथ ही खरीदे गए हीटर की संख्या का भी फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाना चाहिए। ताकि खरीदी में यदि गालमेल और घोटाला हुआ है तो उसका पता लगाया जा सके।

उल्लेखनीय कि पूर्व वर्षों में भी हीटर खरीद कर नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर लगाए जाते रहे हैं, लेकिन दूसरी बड़ी हीटर नजर ही नहीं आते। ऐसे में क्या यह समझा जाए की लिखो फेको पेन की तरह हीटर भी होता है जो केवल एक बार उपयोग में आता है और कचरे की डिब्बी में फेंक दिया जाता है? याद रहे कि नगर निगम कोरबा भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रहा है और पूर्व में अनेक अधिकारी जेल की हवा खा चुके हैं। जिले के डीएफ घोटाले की विस्तृत जांच किए जाने पर नगर निगम के भी कई घोटाले उजागर हो सकते हैं। नगर निगम कोरबा में किए जा रहे तथाकथित विकास कार्यों की और चित्र की भी जांच किए जाने की आवश्यकता है। डीएमएफ और शासन से प्राप्त होने वाली राशि कोई न केंद्र पर करंट खर्च करने के लिए किसी भी तरह की योजना बना दी जाती है और निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाता है। निगम क्षेत्र में हर साल बनने वाली सड़क इसका सटीक उदाहरण है जो पहले ही बारिश में हर साल उखड़ जाती है और अगले साल फिर करोड़ों रुपए होकर इन सड़कों का नवनिर्माण कराया जाता है।

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