एसईसीएल के रीजनल हॉस्पिटल स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति उदासीन

बिना एमडी मेडिसिन के आईसीयू जहां ऑपरेशन थिएटर नहीं वहां सर्जन, हॉस्पिटल का बुरा हाल

कोरबा 19 दिसम्बर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड कोरबा क्षेत्र का क्षेत्रीय अस्पताल, जो कर्मचारियों और उनके परिजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए स्थापित किया गया था, आज प्रशासनिक लापरवाही, गलत तैनाती और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बनता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में सभी आधुनिक सुविधाएँ मौजूद होने के बावजूद कोल कर्मचारियों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है।

एसईसीएल कोरबा का यह क्षेत्रीय अस्पताल 50 बेड की क्षमता वाला है, जिसमें 5 आईसीयू बेड, 6 केबिन, 18 महिला वार्ड तथा शेष पुरुष वार्ड शामिल हैं। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर, पैथोलॉजी लैब और एक्स-रे जैसी सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह अस्पताल लगभग 10 हजार मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था। वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और ड्यूटी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जहाँ आईसीयू जैसी अति-संवेदनशील इकाई में एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ की अनिवार्य आवश्यकता होती है, वहाँ उनकी नियमित और प्रभावी तैनाती सुनिश्चित नहीं की गई। इसके विपरीत, कुछ डॉक्टर अपनी मनपसंद जगहों पर पदस्थ होकर सुविधाजनक स्थिति में बने हुए हैं, जबकि कोरबा क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाओं का अभाव लगातार बना हुआ है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सेवा शुल्क और जुगाड़ के जरिए अन्य अस्पतालों में ट्रांसफर रुकवाकर या करवा कर पोस्टिंग हासिल की गई, जहाँ आईसीयू जैसी सुविधा तक मौजूद नहीं है।
जिस अस्पताल में आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ पद स्वीकृत हैं, वहाँ जानबूझकर विशेषज्ञों की अनुपस्थिति सेवा नियमों और चिकित्सा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है।

यदि किसी मरीज के साथ कोई गंभीर घटना घटती है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी डॉक्टरों की, अस्पताल प्रशासन की या एसईसीएल प्रबंधन की? अब कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल और स्थायी तैनाती की जाए, इंसेंटिव केअर यूनिट, ऑपरेशन थिएटर और अन्य विभागों में योग्यता अनुसार ड्यूटी सुनिश्चित की जाए,तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

मनमानी का अंतहीन सिलसिला आखिर कब तक?
सूत्रों के अनुसार ड्यूटी के शेष समय में कुछ डॉक्टर जमनीपाली क्षेत्र के निजी अस्पतालों से भी जुड़े हुए हैं, जिससे हितों के टकराव और नियमों के उल्लंघन की आशंका और अधिक गहरी हो जाती है। इसी तरह, जानबूझकर सर्जन की पोस्टिंग ऐसी डिस्पेंसरी में कर दी गई, जहाँ ऑपरेशन थिएटर की कोई व्यवस्था ही नहीं है। इस प्रकार की अव्यवस्थित, नियमविरुद्ध तैनाती से न केवल अस्पताल की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि मरीजों की जान के साथ भी सीधा जोखिम पैदा हो रहा है। समय पर विशेषज्ञ इलाज न मिलने से कर्मचारियों और उनके परिजन निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर हो रहे हैं।

जुगाड़ से पोस्टिंग करा रहे डॉक्टर, मरीज परेशान
जानकारी मिली कि क्षेत्रीय अस्पताल में पदस्थ कई विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सुविधा के अनुसार जुगाड़ कर अन्य क्षेत्रों में पोस्टिंग लेकर व्यवस्थित जीवन जी रहे हैं, जबकि कोरबा क्षेत्रीय अस्पताल में विशेषज्ञ सेवाओं का लगातार अभाव बना हुआ है। पूरे घटनाक्रम में क्षेत्र के महाप्रबंधक और एरिया मेडिकल ऑफिसर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि ये अधिकारी एसईसीएल कर्मचारियों की स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति लगातार उदासीन बने हुए हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मरीजों, कर्मचारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार इस गंभीर मुद्दे की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक न तो तैनाती व्यवस्था में कोई ठोस सुधार किया गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई हुई। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि पूरा मामला जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

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