क्रमोन्नति,विसंगति पूर्ण युक्तिऊक्तकरण पूर्व सेवा गणना सहित अन्य मांगों को लेकर शिक्षक साझा मंच कोरबा ने किया धरना प्रदर्शन

मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग एवं संचालक लोकशिक्षण संचालनालय के नाम नायाब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

कोरबा 2 जुलाई। पूरे प्रदेश में विसंगतिपूर्ण युक्तियुक्तकरण, क्रमोन्नति, पूर्व सेवा गणना सहित शिक्षक एलबी संवर्ग की अन्य प्रमुख मांगो को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसी कड़ी में कोरबा में भी घंटाघर ओपन थियेटर में सैकड़ो की संख्या में शिक्षक साझा मंच कोरबा के बैनर तले बरसते पानी मे धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री, शिक्षा सचिव एवं संचालक लोकशिक्षण संचालनालय के नाम नायाब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञातव्य हो कि लंबे समय से शिक्षक साझा मंच के द्वारा धरना प्रदर्शन ज्ञापन के माध्यम से, अधिकारियों से भेंट करके, यक्तियुक्तकरण की विसंगति, क्रमोन्नति एवं उसकी एरियर्स, पूर्व सेवा गणना सहित अन्य मांगों को शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं लेकिन शासन की तरफ से अभी तक इन मुद्दों पर कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं किया गया है। एक तरफ अधिकारियों द्वारा युक्तिऊक्तकरण में अनेको गड़बड़िया की जा रही है, संलग्नीकरण नहीं किये जाने के शासन के स्पष्ट कड़े निर्देश के बावजूद अधिकारी सलगन्निकरण को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं और शासन के द्वारा ऐसे अधिकारियों पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किया जा रहा है। जब सिविल सेवा आचरण अधिनियम अधिकारियों और कर्मचारियों सबके लिए बराबर है तो फिर अधिकारियों को क्यो अभय दान देकर संरक्षण दिया जाता है यह चिंतन का विषय है। धरना प्रदर्शन में जिला संचालक एवं उवसंचालकगण हरिराम पटेल, विनय झा, सादिक अंसारी, उत्तरा साहू, अशोक राठिया सहित उपस्थित नारी शक्तियों ने धरना को संबोधित किया।

आज के इस धरना प्रदर्शन के संबंध में शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय संचालक डॉ गिरीश केशकर, प्रांतीय उप संचालकगण ओम प्रकाश बघेल, श्रीमती रीता चौधरी, तरुण वैष्णव एवं विपिन यादव, नोहर चंद्रा ने बताया कि युक्तिऊक्तकरण का विरोध शिक्षक नहीं कर रहे बल्कि युक्तिऊक्तकरण के नाम पर 2008 के सेटअप के अनुसार शिक्षकों की संख्या को कम करने, मर्ज करके विद्यालयों की संख्या को कम करने और युक्तिऊक्तकरण में कई गयी विसंगति का विरोध कर रहे हैं।

प्रांतीय संचालक डॉ गिरीश केशकर ने बताया कि एक तरफ शासन शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी विद्यालयों में गरीबी रेखा से नीचे परिवार के कुछ प्रतिशत बच्चों को प्रवेश का प्रावधान बनाया है जिसका पैसा शासन द्वारा उन निजी विद्यालयों को दिया जाता है। यहां पर भेदभाव झलकता है यदि पढ़ाना है तो शासन सभी बच्चों को निजी विद्यालय में प्रवेश दिलाकर उन सबका पैसा भी शासन दे। बच्चों बच्चों में भेद क्यो कर रही है। और नहीं तो निजी विद्यालयों को बच्चों को प्रवेश के माध्यम से जो पैसा दे रही है उसका उपयोग शासकीय स्कूल में शिक्षकों की पद संख्या बढ़ाकर, शिक्षकों की भर्ती कर और शासकीय स्कूल में लगाये तो शासकीय स्कूल और स्कूल के शिक्षा में बच्चे निजी विद्यालयों से ज्यादा अच्छा परिणाम देकर शासन का मान देश मे बढ़ा सकते हैं।

डॉ. केशकर ने आगे बताया कि एक ही भर्ती अधिनियम के तहत नियुक्त श्रीमती सोना साहू को एक पद में 10 वर्ष होने पर न्यालयल के आदेश के बाद क्रमोन्नति और उसका एरियर्स प्रदान किया गया। तो उसी भर्ती अधिनियम ( शिक्षाकर्मी भर्ती अधिनियम) के तहत नियुक्त अन्य शिक्षकों को भी पात्रता रखने के बावजूद क्रमोन्नत वेतनमान का लाभ क्यो नहीं दे रही है। क्या सरकार यही चाहती है कि सभी न्यायालय में जाएं तभी मिलेगा। आखिर शिक्षकों के साथ भेदभाव करने मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान क्यो किया जा रहा है। यह तो भारत के संविधान के समानता के अधिकार का भी उलंघन है और भेदभाव है। सरकार शिक्षकों की भावनाओं को समझते हुए नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा गणना का लाभ देते हुए क्रमोन्नति, पदोन्नति, पेंशन सहित अन्य लाभ प्रदान करते हुए वर्तमान में हुए विसंगतिपूर्ण युक्तिऊक्तकरण को तत्काल निरस्त करते हुए सेटअप 2008 के तहत युक्तिऊक्तकरण की प्रक्रिया अपनाए तो कोई विरोध नहीं होगा।

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