कोरबा निगम के खाते से 80 लाख पार.. अपनों का ख्याल रख, बैंक प्रबंधन के विरुद्ध FIR कराने का निर्देश

कोरबा 13 अप्रैल। भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात नगर पालिक निगम कोरबा में भ्रष्टाचार का एक नया अध्याय जुड़ गया है। ऐसा प्रतीत होता है मानो कोरबा निगम के शासकीय सेवक शासन व जनता की सेवा छोड़ केवल मेवा खाने में ही दिलचस्पी रखते हैं। यही कारण है कि यहां जो भी अधिकारी – कर्मचारी आता है वह खाली झोला लेकर आता है और करोड़ों की संपत्ति लेकर जाता है। कुल मिलाकर कहे तो निगम के अधिकारी कर्मचारियों का एक ही मूल मंत्र है राम नाम जपना, सरकारी माल अपना

ताजा मामले की बात करें तो नगर पालिक निगम कोरबा के एक्सिस बैंक के खाते से लगभग 80 लाख रुपए छूमंतर हो गए हैं। निगम के द्वारा आधिकारिक तौर पर इस जादूगरी के पीछे एक्सिस बैंक के कर्मचारी व प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है परंतु अंदर खाने चर्चा यह भी है कि इसमें सेवानिवृत्त हो चुके व लंबे समय से गायब रहे अकाउंट ऑफिसर के हाथ की सफाई भी है। वैसे होने को तो इस घोटाले को लेकर पिछले कुछ महीने से निगम के गलियारों में कानाफुसी हो रही थी परंतु निगम के अधिकारियों द्वारा हमेशा ही इस बात को अफवाह कहकर नकारा जाता था। आज निगम आयुक्त के द्वारा मामले का खुलासा करते हुए एक्सिस बैंक प्रबंधन के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाने का निर्देश देकर इसकी पुष्टि कर दी गई।

प्राप्त जानकारी अनुसार एक्सिस बैंक के कर्मचारियों द्वारा नगर निगम की नगद शाखा से नगद लेकर उसे एक्सिस बैंक के खाते में जमा कराया जाता था। इस बीच कैश मैनेजमेंट सर्विसेज के कर्मचारी के द्वारा निगम से नगद राशि लेकर उसे खाते में जमा करने के बजाय गबन कर लिया जाता रहा। आयुक्त आशुतोष पांडे के पदभार ग्रहण करने के पश्चात खातों में गड़बड़ी की बात सामने आई जिस पर उन्होंने खातों की जांच का आदेश दिया। जांच में लगभग 80 लाख रुपये की राशि निगम के खाते में नहीं होना पाया गया जिस पर कार्यवाही करते हुए आज निगम आयुक्त ने मामले में एक्सिस बैंक प्रबंधन व नगद राशि ले जाने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाने का निर्देश दिया है।

अपने तो अपने होते हैं

निगम के अधिकारी इस गड़बड़झाले के लिए बैंक कर्मचारी को दोषी ठहरा रहे हैं और अपने सेवानिवृत्त लेखाधिकारी को क्लीन चिट दे रहें है। परंतु यह बात हजम नहीं होती कि इतने लंबे समय तक निगम के खाते में राशि जमा नहीं होती रही और लेखाधिकारी को इसकी भनक भी नहीं लगी। वहीं उक्त लेखाधिकारी सेवानिवृत होने के कई दिनों पहले से अपनी सेवानिवृत्ति तक ड्यूटी से गायब रहा था। अब इसे चोर की दाढ़ी में तिनका ना कहे तो क्या कहें।

जानकारों की माने तो उक्त लेखाधिकारी के सीने में कई राज दफन है। अगर उसे इस प्रकरण में अभय दान नहीं दिया गया तो कइयों के काले चिट्ठे बाहर आ सकते हैं। क्योंकि इस मामले के अलावा कागजों में हुई मशीन खरीदी में लगभग डेढ़ करोड़ के घोटाले की चर्चा भी निगम के गलियारों में अभी व्याप्त है जिससे अधिकारियों की धड़कनें बढ़ी हुई है। इसलिए ही निगम अधिकारियों द्वारा महोदय को इस मामले से दूर रखकर फेयरवेल गिफ्ट दिया जा रहा है। ऐसा हो भी क्यों न, अपने तो आखिर अपने होते हैं।

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