कस्टम मिलिंग की उगाही के लिए राईस मिलर्स को धमकाया गया.!

रायपुर। राजनीतिक चंदा वसूली के तार रायपुर से लेकर सूरजपुर तक जुड़े हुए हैं। रोशन चंद्राकर ने इसके लिए मार्कफेड के तत्कालीन एमडी, जो दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए थे, उनके साथ मिलकर राज्य के सभी जिलों के जिला विपणन अधिकारी के साथ स्थानीय स्तर पर राइस मिल एसोसिएशन से जुड़े लोगों की मदद से 140 करोड़ रुपए से ज्यादा की उगाही की। जिन अधिकारियों ने उगाही करने में मदद नहीं की, उनका वहां से तबादला कर दिया गया। कस्टम मिलिंग की उगाही की रकम वसूली करने रायपुर में अलग-अलग ठिकाने बनाए गए थे, जहां कस्टम मिलिंग की उगाही की रकम पहुंचती थी।

कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच में एसीबी ने पाया कि कस्टम मिलिंग के एवज में मिलने बाली प्रोत्साहन राशि में कमीशन वसूलने रोशन चंद्राकर ने राइस मिलरों की रायपुर स्थित मोतीमहल में बैठक बुलाई। इस दौरान सभी राइस मिलरों का धमकाया गया कि जो राइस मिलर उन्हें कमीशन नहीं देंगे, उन्हें प्रोत्साहन राशि जारी नहीं की जाएगी। इसके बाद इसी तरह की बैठक सभी जिलों में जाकर रोशन चंद्राकर ने राइस मिलरों के साथ कर कमीशन देने बाध्य किया। एसीबी की जांच में तथ्य सामने आया है कि रोशन चंद्राकर ने मिलरों के ऊपर दबाव बनाकर प्रोत्साहन राशि जारी करने के एवज में कमीशन वसूली की। रोशन चंद्राकर ने इसी तरह से सभी जिलों में अपने करीबियों के माध्यम से राइस मिलरों के ऊपर प्रोत्साहन राशि देने के बदले कमीशन देने दबाव बनाया।

जांच में यह बात भी सामने आई है कि रोशन चंद्राकर सप्ताह में चार दिन मार्कफेड के एमडी मनोज सोनी के केबिन में घंटों बैठते थे। रोशन जब मनोज के केबिन में होता था, तब केबिन में किसी की एंट्री नहीं होती थी। साथ ही रोशन चंद्राकर जब भी मनोज के साथ मिलने मार्कफेड मुख्यालय जाता था। एंट्री रजिस्टर में रोशन हस्ताक्षर नहीं करता था।

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