सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन में एक वर्ष भी नहीं टिक पा रहे अधिकारी

व्यवहारिक समस्याओं से राइस मिलर्स परेशान

कोरबा 14 सितंबर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 2 वर्ष बाद राजस्व जिला कोरबा में प्रदेश सरकार ने सिविल सप्लाई कारपोरेशन का कार्यालय शुरू किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कार्यालय शुरू होने के इन 22 वर्षों में 23 अधिकारियों की पदस्थापना हो चुकी है। और अब नए अधिकारी की तलाश का काम तेज हो गया है। जिले का भूगोल और यहां कामकाज के समीकरण अधिकारियों के मोह भंग होने के पीछे सबसे बड़े कारण बताए जा रहे हैं।

सरकार के खाद्य विभाग के अंतर्गत नागरिक आपूर्ति निगम काम करता है। 25 मई 1998 को पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश सरकार ने कोरबा को पृथक राजस्व जिला बनाने का काम किया। लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम का जिला स्तरीय कार्यालय और अधिकारी की पदस्थापना पूरे 5 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद की गई। 1 अप्रैल 2022 को सरकार के द्वारा यहां दुर्गा प्रसाद तिवारी की पदस्थापना की गई और जल्दी-जल्दी अधिकारियों को बदले जाने का सिलसिला यहां से ही शुरू हो गया। वे एक महीने भी यहां पर नहीं रहे जबकि 26 अप्रैल को ही उनकी कोरबा से विदाई हो गई। उनके बाद से नागरिक आपूर्ति निगम के इस कार्यालय में 22 और अधिकारी पदस्थ किए गए। इनमें से कोई 2 महीने रहा कोई चार महीने और बहुत ज्यादा हुआ तो 8 महीने या इससे कुछ अधिक समय। लेकिन किसी भी अधिकारी की पदस्थापना के दौरान ऐसा नहीं हुआ कि उसने एक वर्ष इससे अधिक का समय जिला प्रबंधक या प्रभारी के रूप में कोरबा में व्यतीत किया हो। सार्वजनिक उचित मूल्य की दुकान मैं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक राशन पहुंचाने, आपूर्ति निगम के गोदाम में खाद्यान्न का भंडारण से लेकर निगरानी राइस मिलर्स के स्तर पर विभिन्न कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी इस विभाग पर है।

जानकारी के अनुसार दूसरे जिलों की तुलना में यहां पर चुनौतियां ज्यादा है और यहां का भूगोल अधिकारियों को कुछ ज्यादा परेशान करता है। कई और भी दिक्कतें हैं जिसके चलते उन्हें काम करने में असहज महसूस होता है। संभवत इसलिए सरकार की ओर से जिस अधिकारी की पदस्थापना प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण जिलों में शामिल कोरबा में की जाती है वे यहां पर अधिक समय तक रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाते। नई जानकारी मिली है कि सरकार का खाद्य विभाग नागरिक आपूर्ति निगम के कोरबा कार्यालय के लिए नए अधिकारी को भेजने की तैयारी में है और सब कुछ ठीक रहा तो यह काम इस महीने के अंत तक या अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक पूरा हो सकता है। यानी कोरबा में कुछ महीने पहले ही जिस जिला प्रबंधक को सदस्य किया गया है उन्हें किसी और जिले में शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।

कोरबा जिले को एक प्रकार से प्रयोगशाला बना दिया गया है जहां पर मनमानी तरीके से अधिकारियों की पदस्थापना और उनके ट्रांसफर का खेल खेला जा रहा है। कई मौके पर तो यह होता है की नवपदस्थ अधिकारी जिले को समझ ही नहीं पाते हैं और उनका स्थान बदल दिया जाता है। इन सब कारणों से सबसे अधिक परेशानी जिले के राइस मिलर्स के सामने है। उनके अनेक मामले भुगतान के लिए लंबित है। बार-बार अधिकारियों के आने जाने के चक्कर में कुल मिलाकर उनकी समस्या बढ़ रही है। राइस मिलर्स चाहते हैं कि सरकार को कम से कम इस मामले में नीति बेहतर करना चाहिए।

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