शहरी उपभोक्ताओं पर बिजली बिल का बकाया बढकर हुआ 136 करोड़

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वितरण कंपनी

वितरण कंपनी के सामने बकाया राशि मार्च 2026 तक वसूलना अहम् चुनौती

कोरबा 11 फरवरी। छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी ने रजत जयंती वर्ष को उपलब्धि भरा करार दिया है। यहां-वहां कार्यक्रम के साथ उपभोक्ताओं का सम्मान हो रहा है और उन्हें विभाग की योजनाएं बताई जा रही है। इन सबके बावजूद कोरबा जिले के शहरी संभाग में सरकारी से लेकर व्यवसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली बिल के बकाए की रकम 136 करोड़ तक जा पहुंची है। समय के साथ बिल अदा न करने और वसूली पर ध्यान न देने से आंकड़ा यहां तक पहुंचा है।

वितरण कंपनी के सामने एक तरह से बकाया राशि का काफी हिस्सा मार्च 2026 तक वसूलना अपने आपमें अहम् चुनौती है। कंपनी ने मिशन बोड में इस काम को करने का संकल्प लिया है लेकिन सफलता कितनी मिलेगी, कह पाना मुश्किल है। वितरण कंपनी के शहर संभाग के अंतर्गत नगर निगम का संपूर्ण क्षेत्र शामिल किया गया है। इसमें छोटे-बड़े उद्योग से लेकर सरकारी विभाग और आम उपभोक्ता शामिल हैं। पहले से मौजूद कनेक्शनों के अलावा नए कनेक्शनों की बड़ी संख्या ऐसी है जो नियमित रूप से कंपनी को बिजली बिल का भुगतान करने के मामले उदासीन हैं। बताया गया कि लगातार बिजली बिल का भुगतान न करने से जहां उपभोक्ताओं पर पेनाल्टी पड़ती है वहीं इसी के समानांतर बकाया की राशि में इजाफा होता है। ऐसे में दबाव पडने पर दो ही विकल्प होते हैं। मीटर उखाड़ो या फिर डिस्कनेक्शन करो। खबर के अनुसर 136 करोड़ के बकाया में कुछ मामले तो लाखों के हैं और बहुत सारे विभागों का बकाया करोड़ से पार हो गया है। तमाम कोशिशों के साथ कंपनी ने प्लानिंग की है कि कम से कम अगले महीने समाप्त हो रहे मौजूदा वित्तीय वर्ष तक बकाया का अच्छा-खासा हिस्सा वसूल कर लिया जाए। उसने तय किया है कि कई स्तर पर ऐसी टीमें गठित करते हुए उपभोक्ताओं को मैनुअली व ऑनलाइन भुगतान के लिए तैयार किया जाए। उन्हें जागरूक किया जाएगा कि समयबद्ध भुगतान से लाभ क्या हैं और अनदेखी से करने किस प्रकार के टेंशन हो सकते हैं।

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जानकारी के अनुसार वितरण कंपनी को नेताओं की सिफारिश का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसके अंतर्गत मंत्री और मेयर के फोन अथवा लिखित गारंटी प्राप्त होने पर संबंधित उपभोक्ताओं को राहत दी जाती है। एक समय तक बकाया होने पर भी उनके मामलों में डिस्कनेक्शन जैसी कार्यवाही करने से कंपनी बचती है। हालांकि सीधे तौर पर अधिकारी बोलने से बचते हैं, लेकिन उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन के खिलाफ हम कैसे जा सकते हैं।

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