satori app ka malik
R.O. No. 13952/23

भिलाई –   छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर एक बार फिर सुर्खियों में है। भिलाई के एक सामान्य परिवार से निकलकर दुबई तक पहुंचने और हजारों करोड़ रुपये का अवैध सट्टा कारोबार खड़ा करने तक का उसका सफर कई सवाल खड़े करता है। कभी कपड़े की दुकान में नौकरी करने वाले सौरभ की कहानी अब देश के बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल हो चुकी है।

सौरभ चंद्राकर ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उसने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआती दिनों में वह भिलाई में कपड़े की दुकान पर नौकरी करता था, जहां उसे हर महीने करीब 12 से 14 हजार रुपये मिलते थे। बाद में उसने अपने भाई के साथ मिलकर जूस का कारोबार शुरू किया। इसी दौरान उसकी सट्टेबाजी में दिलचस्पी बढ़ी और धीरे-धीरे वह इस अवैध कारोबार के नेटवर्क से जुड़ गया।

 

जूस की दुकान से शुरू हुआ सफर, सट्टे की लत ने बदली जिंदगी

सौरभ ने भिलाई में अपने भाई के साथ ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से दुकान शुरू की थी। बताया जाता है कि इसी दौरान उसे सट्टा खेलने की आदत लग गई। सट्टेबाजी में पैसे गंवाने के बाद उसने इसी क्षेत्र में अपना नेटवर्क खड़ा करने की दिशा में काम शुरू किया। आगे चलकर महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप का नेटवर्क विकसित हुआ, जिसके जरिए देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार संचालित होने लगा।

 

2019 में दुबई पहुंचा सौरभ, वहीं से चलाने लगा नेटवर्क

रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर 2019 में दुबई पहुंच गया था। इसके बाद दुबई को केंद्र बनाकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क संचालित किया जाने लगा। इस नेटवर्क में पैनल ऑपरेटर, एजेंट और सब-एजेंट शामिल थे।  एजेंटों के माध्यम से ग्राहकों को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाते थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए करीब 6000 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा किया गया।

 

शादी में खर्च किए करीब 200 करोड़ रुपये

सौरभ चंद्राकर की आलीशान शादी भी काफी चर्चा में रही थी। बताया गया कि उसने अपनी शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इस आयोजन में बड़ी रकम खर्च होने की खबरों ने महादेव ऐप के कथित अवैध कारोबार और उससे अर्जित संपत्ति को लेकर सवाल खड़े किए थे।

2022 में पुलिस की कार्रवाई से सामने आया मामला

महादेव ऐप से जुड़े नेटवर्क के संकेत वर्ष 2021 में पुलिस को मिले थे। इसके बाद 30 मार्च 2022 को दुर्ग पुलिस ने छापेमारी कर इस संगठित सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में बैंक खातों के जरिए लेन-देन और हवाला के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई।

ED की जांच में मनी लॉन्ड्रिंग और राजनीतिक विवाद

अक्टूबर 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। जांच के दौरान क्रिकेट के अलावा पोकर, तीन पत्ती और चुनावों पर ऑनलाइन सट्टा लगाए जाने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई। महादेव ऐप मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी बड़ा विवाद बना। ED ने दावा किया था कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 508 करोड़ रुपये तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचाए जाने थे। यह दावा गिरफ्तार आरोपी शुभम सोनी के बयान के आधार पर किया गया था। हालांकि, इस मामले में सामने आए आरोपों और दावों पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

अब सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी और उसे रायपुर लाए जाने के बाद महादेव ऐप मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में है। जांच एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क से जुड़े लोगों, कथित लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों पर है।

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