रायपुर- पीवी एप यानी फिजिकल वेरीफिकेशन के लिए तैयार कराए गए एप से किए जा रहे सत्यापन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पटवारियों के माध्यम से इसे कराया जाना है लेकिन जिस तरह की समस्या सामने आ रही उससे पटवारी डरे हुए हैं।
पिछले साल इस एप के माध्यम से सिर्फ फिजिकल वेरीफिकेशन कराया जा रहा था, लेकिन इस बार व्यवस्था बदल दी गई है। इस बार पटवारियों को जाकर किसी भी खेत की मेड़ के चारों ओर से फोटो खींचकर उसका पॉलिगॉन बनाना है।
इसके बाद उसे एप में दर्ज करना है लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि इस एप को कोई भी कहीं से भी चला सकता है। इसके अलावा इसकी मैपिंग भी में बड़ी समस्या सामने आई है। भाठागांव में दर्ज खसरे की जब मैपिंग की गई तो वह नक्शे में अफ्रीका के समुद्र में दिखाने लगा। इसी तरह जब कवर्धा जिले के खैरा गांव की मैपिंग की गई तो पूरे गांव का खसरा एक ही नक्शे के भीतर समा गया। इसी तरह जब तक किसान सामने नहीं होगा मैपिंग करना भी आसान नहीं है इससे भविष्य में और जमीन के विवाद बढेंगे।
इसलिए तैयार करवाया गया है एप पीवी ऐप मुख्य रूप से गिरदावरी प्रक्रिया को कागजी फाइलों से निकालकर पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए तैयार करवाया गया है। इसके निर्माण के पीछे ये मुख्य उद्देश्य है।
जीपीएस-जियो-टैगिंग से भौतिक सत्यापन
खेत में खड़े होकर ही फोटो अपलोड करने और जीपीएस लोकेशन कैप्चर करने की व्यवस्था की गई, ताकि बिना मौके पर पहुंचे दफ्तर या घर बैठे गिरदावरी करने की गुंजाइश खत्म हो सके। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदा या कीट प्रकोप की स्थिति में सेटेलाइट और फील्ड डेटा के आधार पर प्रभावित रकबे का सटीक और त्वरित आकलन कर मुआवजा बांट सके।
