रायपुर – छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन पर सवाल उठाए हैं। 21 अक्टूबर को जारी निलंबन आदेश का विरोध करते हुए फेडरेशन ने कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
डॉ. गहवई ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) में एडिशनल डायरेक्टर जैसे चिकित्सकीय संवर्ग के पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
निलंबन के आधारों की समीक्षा की मांग
फेडरेशन ने कहा कि, निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 और 22(क) के उल्लंघन का उल्लेख है। कार्रवाई के आधारों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि कार्रवाई प्रतिशोधात्मक या दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो निलंबन निरस्त किया जाए।
CGDF ने कहा कि, न्यायालय की शरण लेना प्रत्येक चिकित्सक का अधिकार है। ऐसे में कार्रवाई की निष्पक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि चिकित्सक अपने वैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल से हतोत्साहित न हों। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि वह उचित और नियमों के तहत होने वाली विभागीय कार्रवाई के खिलाफ नहीं है।
DHS और DME में पदस्थापनाओं की जांच की मांग
फेडरेशन ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) के साथ चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) में भी चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना का मुद्दा उठाया है। संगठन के मुताबिक, ऐसी नियुक्तियों से चिकित्सकों के संवर्गीय अधिकारों, वरिष्ठता और पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
CGDF ने शासन से मांग की है कि दोनों संचालनालयों में विवादित पदस्थापनाओं की लागू सेवा नियमों, संवर्गीय पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर वैधानिक समीक्षा की जाए। साथ ही, प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
फेडरेशन ने कहा कि वह डॉ. गहवई के निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा, चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों की रक्षा और नियमों के अनुरूप नियुक्तियां सुनिश्चित करने की मांग पर कायम है। प्रतिशोधात्मक कार्रवाई सामने आने पर संगठन न्यायिक, प्रशासनिक और लोकतांत्रिक स्तर पर विरोध करेगा।
