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R.O. No. 13952/23
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रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश देते हुए कहा कि ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव को जोड़ना जरूरी है। उन्होंने 22 अक्टूबर 2026 को रायपुर में नुआखाई महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में युवाओं, महिलाओं, किसानों और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी पर अपने विचार रखे।

अन्न का सम्मान और किसानों के योगदान को स्वीकार करना जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि नुआखाई केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। यह पर्व कृषि परंपरा को सहेजने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि अन्न किसानों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना सभी का सामूहिक दायित्व है।

युवाओं के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयास भी राष्ट्र निर्माण में अहम

युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि परिस्थितियां और चुनौतियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक युवा में कुछ नया करने, बेहतर बनाने और अपनी पहचान स्थापित करने की ललक होनी चाहिए। जब युवा अपने व्यक्तिगत प्रयासों को सामूहिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ेंगे, तब देश की प्रगति का मार्ग और मजबूत होगा।

उन्होंने युवाओं से ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ अपने कार्य करने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से भी होता है।

विकसित भारत 2047 में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण

समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति पर प्रसन्नता जताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं की प्रगति का लाभ उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को मिलता है।

उन्होंने पुरुषों और विशेषकर युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी बहनों और बेटियों को ऐसा वातावरण दें, जिसमें वे बिना किसी बाधा के अपने सपनों को पूरा कर सकें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि सोच, व्यवहार और दैनिक आचरण में भी दिखाई देना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में युवाओं के मुख्यधारा से जुड़ने पर जताई प्रसन्नता

राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर युवा नक्सलवाद के भटकाव से निकलकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जहां कभी आतंक का अंधेरा था, वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इस परिवर्तन से युवाओं और उनके परिवारों के कल्याण के साथ राज्य और देश के विकास को भी गति मिल रही है।

राष्ट्रपति का संबोधन सांस्कृतिक विरासत, कृषि के सम्मान, महिला सहभागिता और युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर केंद्रित रहा।

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