बिलासपुर- छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े दुर्गोत्सव के समापन पर बिलासपुर में आकर्षक झांकियां निकाली गईं। इनमें जगन्नाथ स्वामी, खाटू श्याम का दरबार, लड्डू गोपाल, भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा मैया और श्रवण कुमार की झांकियां शामिल थीं। भगवान शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु और भूतों को भी नृत्य करते दिखाया गया।
बुधवार शाम से शुरू हुआ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला गुरुवार सुबह 7 बजे तक चलता रहा। इस दौरान जगह-जगह आकर्षक झांकियों का स्वागत किया गया। झांकियां देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। इसके चलते 3 से 5 किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही।
48 साल पुरानी है झांकियां निकालने की परंपरा
बिलासपुर में दुर्गा प्रतिमा स्थापना की परंपरा 75 साल से चली आ रही है। 9 दिनों तक श्रद्धालु माता की पूजा-आराधना में लीन रहे। शहर में जगह-जगह माता की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। दशहरे के दूसरे दिन बुधवार को भक्तों ने नम आंखों से माता को विदाई दी।
48 साल पुरानी परंपरा के अनुसार, दुर्गा समितियों ने आकर्षक झांकियों के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया। बुधवार शाम को शहरभर की समितियां अपनी झांकियों के साथ निकलीं। देवकीनंदन चौक, सिम्स चौक और हटरी चौक से होते हुए झांकियां पचरीघाट पहुंचीं। बुधवार सुबह से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला पूरी रात जारी रहा।


आकर्षक लाइटिंग के साथ निकलीं झांकियां
आकर्षक लाइटिंग के बीच DJ, धुमाल और ढोल-ताशों की धुन पर लोग थिरकते रहे। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला गुरुवार सुबह तक चलता रहा। इसके लिए आयोजकों ने जबलपुर, राजनांदगांव और गोंदिया से झांकियां मंगाई थीं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए धुमाल और बैंड की धुन पर श्रद्धालु प्रतिमाएं लेकर आगे बढ़ते रहे।
झांकियां देखने के लिए 3 से 5 किलोमीटर तक लोगों की भीड़ लगी रही। शहर के साथ आसपास के गांवों के अलावा रायपुर, कोरबा, मुंगेली और जांजगीर-चांपा से भी लोग पहुंचे। अलग-अलग समाज और संगठनों ने जगह-जगह मंच लगाकर दुर्गा समितियों का स्वागत किया। इसके अलावा छठघाट पर भी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

राजनांदगांव-गोंदिया से मंगाई गईं झांकियां
मध्य नगरी दुर्गोत्सव समिति ने 50वें साल को खास बनाने के लिए माता के आगमन के साथ विदाई की भी विशेष व्यवस्था की थी। इसमें शिव-सती की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इसमें माता के 51 स्वरूपों को दर्शाया गया।
समिति के सदस्यों ने बताया कि यह झांकी राजनांदगांव से मंगाई गई थी। इसके अलावा गोंदिया से मां गंगा के उद्गम को दर्शाती भागीरथी की झांकी मंगाई गई थी। युवाओं को माता-पिता की सेवा के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से श्रवण कुमार की झांकी भी निकाली गई।
संजीवनी बूटी के लिए पहाड़ उठा लाए हनुमान
झांकियों में भूतिया डांस के साथ लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने पहाड़ उठाकर ले जाते हनुमान को भी दिखाया गया। वहीं, भगवान शंकर की बारात, खाटू श्याम का दरबार और भगवान शिव की जटाओं से निकलती गंगा मैया की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

बंगाली समाज की महिलाओं ने खेला सिंदूर
विनोबा नगर, तोरवा सहित अन्य जगहों के मंदिरों और बंगाली पंडालों में महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर माता को विदाई दी। साईं परिसर में भी शारदीय नवरात्रि पर षष्ठी से नवमी तक दुर्गा पूजा महोत्सव मनाया गया। दशमी पर सिंदूर खेला के साथ विजयादशमी का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों से मनाया गया।
महोत्सव में माता की चौकी, गरबा और बच्चों, महिलाओं के आकर्षक नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। दशमी पर महिलाओं ने सिंदूर खेला में हिस्सा लिया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की।
गांधी चौक से देवकीनंदन चौक तक उमड़ी भीड़
दुर्गोत्सव के समापन पर झांकियां देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। देवकीनंदन चौक से गांधी चौक और पुराना बस स्टैंड से तेलीपारा, गोंडपारा, सदरबाजार और जूना बिलासपुर तक लोगों की भीड़ रही।
कई जगहों पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। करीब 3 से 5 किलोमीटर तक सड़कों पर लोगों की भीड़ और झांकियों के साथ दुर्गा प्रतिमाएं लेकर निकलती समितियों की टोलियां नजर आईं। लोग पैदल घूम-घूमकर झांकियां देखते रहे।
