रायपुर – छत्तीसगढ़ का शिक्षा विभाग 14 हजार से ज्यादा मुकदमों में उलझा हुआ है। पुरानी पेंशन, क्रमोन्नति और प्रमोशन से लेकर जीपीएफ से रकम निकासी तक के मामलों में शिक्षक कोर्ट पहुंच गए हैं।
सबसे ज्यादा विवाद पुरानी पेंशन के लिए सेवा की गणना और प्रमोशन को लेकर है। वहीं, जीपीएफ खातों से 40 से 90 लाख रुपए तक की कथित निकासी के मामले भी सामने आए हैं।
इनमें शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने रकम निकाली ही नहीं, फिर भी उनसे रिकवरी की जा रही है। मुकदमों का बोझ इतना बढ़ गया है कि विभाग को कोर्ट में जवाब पेश करने और प्रकरणों की निगरानी के लिए दो अफसर तैनात करने पड़े हैं।
दरअसल, पिछले दिनों कांकेर में जीपीएफ से 90 लाख रुपए की कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद भास्कर ने शिक्षा विभाग से जुड़े अदालती मामलों की पड़ताल की। इसमें पता चला कि प्रदेशभर में अलग-अलग मुद्दों पर 14 हजार से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई हैं।
इनमें करीब 6 हजार मामले पुरानी पेंशन और 5 हजार क्रमोन्नति से जुड़े हैं। प्रमोशन को लेकर भी करीब एक हजार प्रकरण हैं। इसके अलावा जीपीएफ, ट्रांसफर और स्कूलों में पढ़ाई के माध्यम को लेकर भी विवाद कोर्ट पहुंचे हैं। हालांकि, इनमें कुछ मामलों का निराकरण हो चुका है। विभाग अब पुराने प्रकरणों की समीक्षा कर उनके निपटारे में आ रही बाधाओं का पता लगा रहा है।
हाईकोर्ट से राहत का दावा, अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी: पुरानी पेंशन के विवाद में शिक्षक अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के सामने अपना प्रकरण रखा है। शिक्षकों का दावा है कि हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया है, इसके बावजूद शिक्षा विभाग पुरानी सेवा को पेंशन की गणना में शामिल नहीं कर रहा है। इसी मुद्दे को अब सर्वोच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी है।
टेट पास और वरिष्ठ शिक्षक आमने-सामने, दोनों वर्ग कोर्ट पहुंचे: शिक्षकों के प्रमोशन में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) की अनिवार्यता ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के सैकड़ों शिक्षक अदालत पहुंचे हैं। एक वर्ग अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन मांग रहा है।
इनका तर्क है कि केवल टेट पास होने के कारण जूनियर शिक्षकों को वरिष्ठों से आगे नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर, टेट पास शिक्षक पात्रता पूरी करने के बावजूद प्रमोशन नहीं मिलने को चुनौती दे रहे हैं। इस तरह एक ही मुद्दे पर शिक्षकों के दो वर्ग अलग-अलग मांगों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
जीपीएफ से निकल गए लाखों रुपए, रिकॉर्ड गायब; रिकवरी पर विवाद: जीपीएफ से जुड़ी गड़बड़ियों के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें शिक्षकों के खातों से रकम निकाली गई, लेकिन संबंधित शिक्षक निकासी से इनकार कर रहे हैं। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन संबंधी भुगतान रोकने या रिकवरी शुरू होने पर वे कोर्ट पहुंचे हैं।
ऑनलाइन रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था। पिछले तीन-चार वर्षों में 40 लाख से 90 लाख रुपए तक की कथित निकासी के मामले सामने आए हैं। विभाग रकम की रिकवरी करना चाहता है, जबकि शिक्षक निकासी से इनकार कर रहे हैं। रिकॉर्ड के अभाव में इन मामलों का निराकरण अटका है।
हिंदी माध्यम बंद करने का फैसला कोर्ट पहुंचा, अब दोनों माध्यम चल रहे
सरगुजा और बस्तर के करीब 24 स्कूलों में हिंदी माध्यम बंद कर अंग्रेजी माध्यम शुरू करने के फैसले को प्राचार्यों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। इनमें अंबिकापुर, मैनपाट, सीतापुर, बतौली और जामनगर सहित आसपास के स्कूल शामिल थे।
प्राचार्यों का तर्क था कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पहले ही स्कूलों की कमी है। हिंदी माध्यम बंद होने से 600 से 800 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती। इनके प्रवेश का विकल्प भी स्पष्ट नहीं था। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद संबंधित स्कूलों में हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं भी चल रही हैं। इन याचिकाओं का निपटारा हो चुका है।
विवाद: 1998 से सेवा की गणना चाहते हैं शिक्षक
पुरानी पेंशन को लेकर शिक्षकों और शासन के बीच सबसे बड़ा विवाद सेवा की गणना का है। शिक्षक 1998 से शिक्षाकर्मी के रूप में की गई सेवा को पेंशन में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, जबकि शासन 2018 में संविलियन के बाद की सेवा को मान्य कर रहा है।
पुरानी पेंशन के लिए न्यूनतम 10 साल की सेवा जरूरी है। ऐसे में संविलियन के बाद 10 साल पूरे होने से पहले सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों के सामने पेंशन का संकट खड़ा हो गया है। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके शिक्षक भी पुरानी सेवा की गणना कराने के लिए कोर्ट पहुंचे हैं।
कोर्ट में चल रहे सभी प्रकरणों के जल्द निराकरण पर फोकस है। लीगल टीम पुराने मामलों की समीक्षा कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कौन से प्रकरण किन कारणों से लंबित हैं। इनके जल्द निराकरण का प्रयास किया जाएगा। -कमलप्रीत सिंह, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग
नोट: ये अनुमानित आंकड़े हैं। पुरानी पेंशन के कुछ प्रकरणों और आत्मानंद स्कूलों से जुड़ी याचिकाओं का निराकरण हो चुका है।
