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R.O. No. 13952/23
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रायपुर/सिंगापुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों और वन्यजीवों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंगापुर के Mandai Wildlife Reserve का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास के प्रबंधन और पर्यटकों के लिए विकसित सुविधाओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री साय ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व का भ्रमण किया। उन्होंने वहां संरक्षण और पर्यटन के बीच बनाए गए संतुलन को समझा तथा यह देखा कि आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के साथ वन्यजीवों और प्राकृतिक वातावरण को किस तरह सुरक्षित रखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के पास प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी ताकत

छत्तीसगढ़ का करीब 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैले जंगल, जैव-विविधता और वन्यजीव प्रदेश को इको-टूरिज्म के लिए विशिष्ट बनाते हैं। राज्य में कई राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और प्राकृतिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जिन्हें बेहतर सुविधाओं के साथ देश-विदेश के पर्यटकों से जोड़ने की संभावनाएं हैं।

सरकार का प्रयास प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करना है, ताकि स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को भी इससे रोजगार और आय के अवसर मिल सकें।

सिंगापुर का मॉडल नहीं, अनुभव होगा छत्तीसगढ़ के काम

Mandai Wildlife Reserve के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव प्रबंधन, पर्यटक अनुभव, जागरूकता गतिविधियों और प्राकृतिक परिवेश में पर्यटन विकास की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगापुर की व्यवस्था को ज्यों का त्यों लागू करने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के अनुरूप ढाला जाएगा।

फोकस: वन्यजीव संरक्षण, आधुनिक पर्यटन सुविधाएं और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को एक साथ जोड़कर छत्तीसगढ़ में टिकाऊ इको-टूरिज्म मॉडल विकसित करना।

बस्तर से सरगुजा तक पर्यटन की नई संभावनाएं

बस्तर, कांगेर घाटी, अचानकमार, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और पर्यटन क्षमता को सामने रखते हैं। इन क्षेत्रों में संरक्षण के साथ बेहतर कनेक्टिविटी, पर्यटक सुविधाएं और स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा देकर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय इको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय का सिंगापुर दौरा इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों से सीख लेकर उन्हें छत्तीसगढ़ की जरूरतों के मुताबिक लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

उद्देश्य साफ है—जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें, पर्यटन बढ़े और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलें।

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