रायपुर – लगातार दावे और जनजागरुकता अभियान चलाने के बावजूद गणेश की मूर्तियों ने उन दावों की पोल खोल दी, जिनमें कहा जा रहा था कि पीओपी (प्लास्टर आफ पेरिस) की मूर्तियां बनाई ही नहीं जा रही हैं।

लेकिन खारुन नदी के किनारे बनाए गए विशाल विसर्जन कुंड से जैसे ही पानी उतरा, वैसे ही सच सामने आ गया। मिट्टी की मूर्तियां तो घुल गईं लेकिन पीओपी की मूर्तियां जस की तस बनी हुई हैं। मिट्टी के गणेश बनाने का दावा करने वाले मूर्तिकारों की करनी सामने आ गईं। दरअसल पिछले कुछ सालों में पीओपी की मूर्तियों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई सुस्त पड़ गई है।
भास्कर ने चला रखा है अभियान
गणेश की मूर्ति सिर्फ मिट्टी की हों और उनका विसर्जन घर पर ही किया जाए, इसके लिए दैनिक भास्कर ने लगातार अभियान चला रखा है। भास्कर के अभियान का असर यह हुआ है कि शहर और गावों में लोगों ने बड़े पैमाने पर मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन अपने-अपने घरों में ही किया है।
