कोरबा। आदिवासी विकास विभाग में छात्रावास और आश्रमों के लिए होने वाली करीब 20 लाख रुपये की बेडशीट खरीदी अब सिर्फ एक सामान्य सरकारी खरीदी का मामला नहीं रह गई है। 4,100 बेडशीट की इस खरीदी में Limited Tender की प्रक्रिया और विभागीय स्तर पर इसे आगे बढ़ाने को लेकर लिपिक अमन राम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
अमन के पास खरीदी और DMF का प्रभार होने का दावा
विभागीय सूत्रों के मुताबिक लिपिक अमन राम के पास DMF और खरीदी से संबंधित काम का प्रभार है। इसी वजह से करीब 19.96 लाख की इस खरीदी की प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अमन का नाम डीएमएफ घोटाले की आरोपी माया वारियर के करीबी लोगों में लिया जाता रहा है, मामले में ED की जांच में भी शुरुवाती दौर में उससे पूछताछ हुई थी, बावजूद इसके अब भी सेक्शन में कोई फेरबदल नहीं हुआ है !
टेंडर में 4,100 बेडशीट की अनुमानित लागत ₹19,96,700 रखी गई है। इसके हिसाब से विभागीय अनुमान करीब 487 प्रति बेडशीट बैठता है।
अब सवाल यह है कि इस अनुमानित दर का Rate Analysis और Market Survey किस स्तर पर तैयार हुआ और इसे तैयार करने की प्रक्रिया में किस-किस अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका रही ?
Limited Tender ने बढ़ाई अमन की भूमिका पर चर्चा
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Limited Tender को लेकर है। GeM Bid Details में Limited Tender को “Yes” दर्शाया गया है और इसके पीछे तत्काल आवश्यकता को कारण बताया गया है।
लेकिन ATC के अंतिम पेज पर “अपर कलेक्टर सह अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुमोदित” दर्ज है, जबकि उसी ATC में Limited Tender की स्पष्ट स्वीकृति का उल्लेख नजर नहीं आता।
यहीं से सवाल उठ रहा है कि Limited Tender का निर्णय आखिर किस स्तर पर लिया गया और इसे GeM पर किसके निर्देश पर कॉन्फिगर किया गया ?
सूत्र बताते है कि क्रय समिति अध्यक्ष समेत किसी भी सदस्य को लिमिटेड टेंडर की बात जानकारी में नहीं है। टेंडर को इतने सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया है कि टेंडर अपने आप मे सामान्य दिखता है मसलन छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम का पालन करते हुए 5 लाख से अधिक की खरीदी होने से निर्धारित 30 दिवस का बिड शुरू होने से खुलने तक मे समय रखा गया है, शायद यही वजह है कि सहायक आयुक्त को भी यह सामान्य टेंडर लगा लेकिन जब कोई टेंडर भरने जाएगा तो उसे एंट्री ही नहीं मिलेगी एंट्री सिर्फ उसी को मिलेगी जिसको इंवॉइट किया जाएगा। यहीं ‘अमन बाबू’ की भूमिका संदेहास्पद बताया जा रहा है !
ऐसे में सवाल जरूर खड़ा हो रहा है कि अगर यह निर्णय क्रय समिति के स्तर पर हुआ है तो उसकी कार्यवाही सामने आनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी के स्तर से निर्णय लिया गया तो संबंधित नोटशीट और सक्षम स्वीकृति भी जांच का हिस्सा होनी चाहिए।
अपर कलेक्टर ने ATC मंजूर किया, फिर GeM पर क्या बदला ?
ATC के आखिरी पेज पर अपर कलेक्टर सह अध्यक्ष की मंजूरी स्पष्ट रूप से दर्ज है। दस्तावेज में GeM पर ATC डाउनलोड, Bid Submission, Negotiated Rates, Delivery और Payment जैसी शर्तों का उल्लेख भी है।
लेकिन Limited Tender का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
यही अंतर अब जांच का प्रमुख बिंदु बन गया है।
सवाल यह है कि क्या ATC की मंजूरी के बाद GeM Bid Configuration में Limited Tender का विकल्प अलग से चुना गया? अगर हां, तो उसका आदेश किसने दिया?
‘तत्काल खरीदी’ के तर्क पर भी सवाल
Limited Tender के पीछे तत्काल जरूरत बताई गई है। लेकिन Bid 25 अगस्त से 24 सितंबर 2026 तक चली। यानी लगभग एक महीने का समय दिया गया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब खरीदी इतनी तत्काल थी कि प्रतिस्पर्धा का दायरा सीमित करना जरूरी समझा गया, तो फिर Bid प्रक्रिया के लिए लगभग 30 दिन क्यों रखे गए?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Technical Bid 24 सितंबर को खोली जा चुकी है, लेकिन अंतिम Technical Evaluation अभी सामने नहीं आया है।
क्या किसी खास सप्लायर को रास्ता देने की तैयारी थी?
विभागीय सूत्रों के मुताबिक खरीदी से जुड़े मामलों में कुछ खास फर्मों के नाम लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। सूत्रों ने अमन राम की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि अभी तक उपलब्ध दस्तावेजों से यह साबित नहीं होता कि अमन राम ने किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्रिया तैयार की। इसलिए इस दावे की पुष्टि Technical Evaluation, Tender Committee की कार्यवाही और Financial Bid के बाद ही हो सकेगी।
लेकिन यदि Technical Evaluation में सीमित संख्या में फर्में ही योग्य पाई जाती हैं और बाद में Financial Bid में estimated rate के आसपास ही कीमत आती है, तो पूरी प्रक्रिया की जांच और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
अब अमन से जुड़े फैसलों की फाइल होगी अहम
इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमन राम की फाइल पर क्या भूमिका थी?
- Limited Tender का प्रस्ताव किसने तैयार किया?
- तत्काल खरीदी का कारण किसने दर्ज किया?
- GeM पर Limited Tender किसने चुना?
- क्या क्रय समिति ने इसे मंजूर किया?
- 19.96 लाख का Estimate किसने तैयार किया?
- Rate Analysis किस आधार पर हुआ?
- Technical Bid की Scrutiny किस अधिकारी या कर्मचारी ने की?
इन सवालों के जवाब संबंधित नोटशीट, अनुमोदन और समिति की कार्यवाही से मिल सकते हैं।
अब Technical Evaluation और Financial Bid पर नजर
फिलहाल Technical Bid खुल चुकी है और अंतिम Technical Evaluation का इंतजार है। इसके बाद Financial Bid खुलने पर L1 फर्म और उसकी वास्तविक दर सामने आएगी।
तब यह भी तुलना की जा सकेगी कि विभाग के 487 प्रति बेडशीट के अनुमान के मुकाबले वास्तविक बोली कितनी आई।
फिलहाल करीब 20 लाख रुपये की खरीदी में Limited Tender की जरूरत, उसकी स्वीकृति और अमन राम की कथित भूमिका तीनों सवालों के केंद्र में हैं।
अब सवाल सिर्फ 4,100 बेडशीट खरीदने का नहीं है। सवाल यह है कि इस खरीदी की पूरी प्रक्रिया किसने तैयार की, Limited Tender का रास्ता किसने चुना और अंतिम फायदा किसे मिलता है? इसका जवाब अब आने वाली Technical Evaluation और Financial Bid से मिलेगा।
