वेदांता पावर हादसा: उद्योग विभाग और संयंत्र प्रबंधन की लापरवाही जिम्मेदार – कांग्रेस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर में हुई दुर्घटना को लेकर कांग्रेस ने तीखे सवाल किए हैं। साथ ही सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने शुक्रवार को संयुक्त पत्रकारवार्ता लेकर घटना के लिए सीधे तौर पर उद्योग विभाग और प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही हाईकोर्ट के वरिष्ठतम रिटायर्ड जज से पूरे मामले की जांच की मांग की है।

बैज ने कहा कि इस दुर्घटना में सरकार की भी लापरवाही है। उन्होंने पूछा है कि दुर्घटना के पहले नियमित जांच की गई थी। जब एक वायलर की सफाई की जाती है तो दूसरे किलेन या वायलर को बंद रखा जाना चाहिए, यहां पर उस मानक का पालन नहीं किया गया। प्रदेश में लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाएं चिंता का विषय है। यह सुरक्षा मानकों के प्रति बरती जा रही घोर लापरवाही है। ऐसी घटना केवल दुर्घटना नहीं हत्या है, सदोष मानव वध है। राज्य में पिछले ढाई सालों में औद्योगिक दुर्घटना में लगभग 300 श्रमिकों की जान गई है।

सदोष मानव वध की धारा लगाएं

नेता प्रतिपक्ष महंत ने कहा कि भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा की स्थिति भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। 20 से अधिक लोग मरे हैं, दोषी पर केवल जमानतीय धारा लगाई गई है। हमारी मांग है सदोष मानव वध की धारा लगाई जाए। घटना में हम सरकार की जांच की घोषणा से संतुष्ठ नहीं है। इतनी बड़ी घटना की जांच एसडीएम कर रहे हैं। हम मांग करते है हाईकोर्ट के सीटिंग जज से जांच कराई जाए। पहले भी इसी वेदांता समूह के बॉलको में 40 लोगों की मौत हुई, यहां भी 20 लोगों की मौत हुई है, यह प्रबंधन की लापरवाही है। ज्यादा मुनाफा कमाने प्रबंधन ने चीनी सामान का तथा विदेशों के कबाड़ लाकर फैक्ट्री बनाया। गलत तथा खराब मशीनरी के उपयोग के कारण दुर्घटना हुई है।

सभी धाराएं जमानती

* धारा 106 (1): उपेक्षापूर्वक कार्य करना। सुरक्षा नियमों का पालन न करना, जिससे बॉयलर फटने जैसी स्थिति बनी और श्रमिकों की जान गई।

* धारा 289: उतावलेपन या लापरवाही से किया गया ऐसा कार्य जिससे मानव जीवन या किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाए।

* धारा 3 (5): सामूहिक उत्तरदायित्व; जब एक से अधिक लोग मिलकर उपेक्षापूर्वक कार्य करते हैं, तो वे सभी समान रूप से दोषी माने जाते हैं।

आपको बता दें कि सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट मामले में पुलिस अब एक्शन मोड में आ गई है। 21 से अधिक श्रमिकों की दर्दनाक मौत के बाद सक्ती पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसते हुए गुरुवार को वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और कंपनी प्रबंधक देवेंद्र पटेल सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर बना हुआ है। वहीं शुक्रवार को रायपुर के निजी अस्पताल में एक घायल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

पुलिस का अगला कदम आरोपियों का बयान दर्ज करना होगा, जिसके लिए चेयरमैन अनिल अग्रवाल को भी डभरा थाना तलब किया जा सकता है। भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने प्लांट में काम करने बाले हजारों श्रमिकों के मन में गहरा खौफ भर दिया है। वर्तमान में प्लांट में कामकाज पूरी तरह ठप है। पिछले तीन दिनों से दहशत के साए में जी रहे एक हजार से अधिक श्रमिक अब अपने गांवों की ओर लौटने लगे है। इनमें से अधिकांश मजदूर बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के निवासी हैं।

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