रायपुर, 4 सितंबर 2026 : शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी शिक्षकों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों और शिक्षा के बदलते स्वरूप को याद करते हुए शिक्षकों से अपील की कि वे हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे विद्यार्थियों का हाथ थामें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में व्यक्ति कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता। आज प्रदेश के बच्चों की शिक्षा से जुड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें अपने बचपन के वे दिन बार-बार याद आते हैं, जब सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल करना आसान नहीं था।
बगिया के स्कूल से शुरू हुआ सफर
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से ही हुई। करीब दस वर्ष की उम्र में चौथी कक्षा में पढ़ते समय पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार, खेती और छोटे भाइयों की जिम्मेदारी भी उनके जीवन का हिस्सा बन गई।
गांव में पांचवीं तक पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहां लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। इसके बाद खेती की जिम्मेदारी संभालते हुए छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।
स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक पहुंची शिक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से शिक्षा की शुरुआत की थी, जबकि आज छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास, डिजिटल माध्यमों और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं। विज्ञान और तकनीक से बच्चों को जोड़ने के साथ दूरस्थ क्षेत्रों में भी शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के साधन बदल गए हैं, लेकिन शिक्षक की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण है। तकनीक जानकारी दे सकती है और किताबें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसके संस्कार गढ़ने का काम एक संवेदनशील शिक्षक ही कर सकता है।
हर बच्चे के सपने को मिले उड़ान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या भौगोलिक परिस्थितियां किसी बच्चे की पढ़ाई और उसके सपनों में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि वह छोटे गांव, वनांचल या दूरस्थ क्षेत्र में पैदा हुआ है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक और व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा एवं स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाने, कौशल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
बस्तर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे, वहां अब फिर विद्यालयों की घंटियां सुनाई दे रही हैं। उनके मुताबिक यह बदलाव केवल स्कूल भवनों और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हर बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने के संकल्प से जुड़ा है।
शिक्षकों से मुख्यमंत्री का आत्मीय आग्रह
मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में बैठा प्रत्येक बच्चा अपने भीतर असीम संभावनाएं लेकर आता है। कोई वैज्ञानिक बन सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक। कई बार बच्चे खुद अपनी क्षमता को नहीं पहचान पाते, लेकिन शिक्षक की पारखी नजर उनकी प्रतिभा को सामने ला सकती है।
उन्होंने विशेष आग्रह करते हुए कहा कि अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य वजह से पीछे रह रहे बच्चे का हाथ जरूर थामें। शिक्षक का विश्वास और प्रोत्साहन किसी विद्यार्थी के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है।
शिक्षकों से मिली सीख को बताया जीवन की पूंजी
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि वे शिक्षक दिवस पर केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि गांव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी अपने शिक्षकों को नमन करते हैं, जिसने उनसे मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूंजी माना।
उन्होंने कहा कि समय के साथ स्कूल, तकनीक और पढ़ाई के तरीके बदलते रहेंगे, लेकिन गुरु-शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का रिश्ता हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
हर स्कूल बने सपनों का द्वार
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों का आह्वान किया कि मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाया जाए, जहां हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थियों के जीवन में आशा की रोशनी जगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो और उनके मार्गदर्शन से प्रदेश की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

