गौपाष्टमी पर कामधेनु गौशाला झाबर में गौ-पूजा संपन्न

कोरबा 30 अक्टूबर। गौपाष्टमी के अवसर पर झावर स्थित कामधेनु गौशाला में श्रद्धालुओं ने परंपरागत विधि से गौ-माता एवं समस्त गोवंश की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही गौ-शाला परिसर में धार्मिक उत्साह का वातावरण रहा। ग्रामीणों, गौ-सेवकों और समाजसेवियों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर गौ-आराधना और सेवा कार्यों में सहभागिता निभाई।

पिछले 15 वर्षों से निरंतर गौ-सेवा और गौ-पूजा का कार्य कर रहे स्थानीय गौ-सेवक अरुणीश तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि “गौ-सेवा केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है। आज जिस तरह गौ-वंश की स्थिति दयनीय होती जा रही है, वह समाज के लिए चेतावनी है।” उन्होंने कहा कि दूध, दही, घी, मक्खन, पनीर, मट्ठा और छाछ जैसे उत्पादों का उपयोग हर धर्म और समुदाय के लोग करते हैं, इसलिए गाय का महत्व किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। “धार्मिक आस्था से अधिक इसे व्यावहारिक जीवन की आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।”

गौ-सेवक ने अपील की है कि लोग कुत्तों या विदेशी पालतू जानवरों की बजाय गो-वंश को अपनाने की परंपरा को पुनर्जीवित करें। “जो लोग गौ-सेवा के नाम पर दिखावा करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि यह धर्म का नहीं, मानवता और पर्यावरण संरक्षण का प्रश्न है।”

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