कोरबा में रोका छेका अभियान बेअसर, मवेशी ने युवक को पहुंचाया अस्पताल, दो दिन का बिल पहुंचा 80 हजार

कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्व पूर्ण योजना रोका-छेका अभियान का असर कोरबा की सड़कों पर नहीं दिख रहा है। मवेशी सड़कों पर स्वच्छंद घूमते रहते हैं, ऐसे ही एक मवेशी से टकराकर गरीब परिवार का एक 22 वर्षीय युवक बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया है। युवक के माता-पिता अब सोशल मीडिया के माध्यम से घर के इकलौते चिराग को बुझने से बचाने के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैंदरअसल शहर के मुड़ापार में शंकर चौहान अपने परिवार के साथ निवास करता है। परिवार में शंकर उसकी पत्नी फुलेश्वरी चौहान व इकलौता पुत्र विक्की चौहान है। शंकर रोजी मज़दूरी कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालता है। बीते दो दिन पूर्व 10 जुलाई को हुए अचानक मवेशी के सामने आ जाने से हुए सड़क हादसे ने चौहान परिवार को तोड़ दिया है। शंकर चौहान का 22 वर्षीय एकलौता पुत्र अपने मामा के साथ मोटर साइकिल पर सवार होकर मानिकपुर से घर की ओर जा रहा था। मुड़ापार पहुचने से पहले एसईसीएल ओल्ड दुर्गा पूजा पंडाल के पास अचानक मोटरसाइकिल के सामने एक गाय आ गयी जिससे वह दुर्घटना का शिकार हो गया। जिसके बाद उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। युवक के मस्तिष्क में अंदरूनी चोट लगने से चिकित्सकों ने युवक की हालत को गंभीर बताया और रेफर कर दिया। परिजनों ने युवक को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया है। जहां उसका उपचार जारी है, दुर्घटना के बाद से ही युवक को होश नहीं आया है वह भी बेहोशी की हालत में है। चिकित्सकों ने युवक की हालत को काफी गंभीर करार दिया है।महज दो दिनों के इलाज के दौरान ही अब तक अस्पताल का बिल 80 हज़ार रुपये पहुंच चुका है। इसके बाद भी अब तक विक्की को होश नहीं आया है।
अपनी व्यथा बताते हुए विक्की के मां की आंखें छलक है वह अपने आंसू रोक नही पायी और कहने लगी कि आगे के इलाज में कितना खर्च होगा हमें तो इसका अंदाजा भी नही है। अपने एकलौते बेटे के इलाज के लिए मां ने जिले वासियों के साथ ही सामाजिक संगठन व प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

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