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R.O. No. 13952/23
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रायपुर-   रायपुर में 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के कथित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने करीब 9500 पन्नों का छठा पूरक चालान विशेष न्यायालय में पेश किया है। इसमें 12 आरोपियों की भूमिका का विस्तृत उल्लेख है।

जांच में कोयला परिवहन से 25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली, रकम के वितरण, राजनीतिक और व्यक्तिगत कामों में इस्तेमाल तथा जमीन, फ्लैट और वाशरी जैसी संपत्तियों में निवेश के तथ्य सामने आने का दावा किया गया है।

EOW ने अपने चालान में कोल घेाटाले सेटअप का विवरण है।
EOW ने अपने चालान में कोल घेाटाले सेटअप का विवरण है।

EOW के मुताबिक, वसूली का पूरा सिस्टम खड़ा करने के लिए करीब 5 करोड़ रुपए के लेन-देन का भी पता चला है। जांच में पप्पू बंसल द्वारा रकम दिए जाने और निखिल चंद्राकर व नवनीत के जरिए रकम रिसीव कर सूर्यकांत तिवारी तक पहुंचाए जाने के तथ्य सामने आने की बात कही गई है।

 

सिंडिकेट के सदस्य आपस में बातचीत और रकम से जुड़े निर्देश देने के लिए 7 अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप का इस्तेमाल करते थे। जब्त मोबाइल, चैट, डायरियों और बैंक लेन-देन को जांच का आधार बनाया गया है।

 

 

15 जुलाई के आदेश के बाद शुरू हुआ वसूली का सिस्टम

EOW की जांच के अनुसार 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी होने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया।

एजेंसी का आरोप है कि इसी व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से 25 रुपए प्रति टन की कथित अवैध वसूली के लिए किया गया। अलग-अलग जिलों से रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी। यहां उसका हिसाब रखने के बाद आगे वितरण किया जाता था।

जांच में अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। EOW के अनुसार सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगी अलग-अलग जिलों में जाकर बैठकें करते थे। उनके ठहरने के लिए विश्राम गृहों में सीएम हाउस के नाम से बुकिंग कराए जाने के साक्ष्य भी जांच में मिले हैं।

बालको और अंबुजा से संबंधित पत्राचार को भी चालान में शामिल किया गया है। EOW के अनुसार, एक पत्राचार में परिवहन बिलों में 25 रुपए प्रति टन की राशि जोड़ने का उल्लेख है।

 

कोयले के साथ पैलेट से भी 100 रुपए प्रति टन

जांच में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से भी 100 रुपए प्रति टन कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। EOW के अनुसार तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य की भूमिका की जांच में सामने आई।

एजेंसी का दावा है कि पैलेट उद्योगपतियों की बैठक लेकर उन्हें सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को 100 रुपए प्रति टन देने के निर्देश दिए गए थे। जब्त डायरियों में इस वसूली से जुड़ी प्रविष्टियां मिलने की बात भी कही गई है।

डायरी में करोड़ों की एंट्री, राजनीतिक काम में खर्च का दावा

चालान में राम गोपाल अग्रवाल, देवेंद्र सिंह यादव, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव प्रसाद राय, जयप्रकाश मौर्य, पियूष कुमार साहू, जोगेन्दर सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा की भूमिका का उल्लेख है।

EOW के अनुसार राम गोपाल अग्रवाल से संबंधित जब्त डायरियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ नाम से 32 प्रविष्टियों में करीब 104.20 करोड़ रुपए दर्ज हैं। एजेंसी का दावा है कि इस रकम को पार्टी से जुड़े कामों तक पहुंचाए जाने के तथ्य मिले हैं।

जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश की जांच

EOW के मुताबिक कोल लेवी से कथित तौर पर प्राप्त रकम को जमीन, फ्लैट, वाशरी और अन्य संपत्तियों में लगाने के साक्ष्य भी मिले हैं। पियूष कुमार साहू की भूमिका परिवार से संबंधित संपत्तियों में रकम निवेश कराने के मामले में बताई गई है।

अनुराग चौरसिया के मामले में फ्लैट और जमीन की खरीद से जुड़े लेन-देन की जांच की गई है। जोगेन्दर सिंह से जुड़ी सात फर्मों में करीब 40 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन का विवरण चालान में शामिल है।

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