रायपुर। राजधानी रायपुर में संपत्तियों के रिकॉर्ड और प्रबंधन को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) अपनी संपत्तियों का हाईटेक डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगा। इसके लिए ड्रोन सर्वे, GIS मैपिंग, जियो-टैगिंग और डोर-टू-डोर सत्यापन जैसे तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पूरी कवायद में RDA की प्रत्येक संपत्ति और भूखंड को यूनिक प्रॉपर्टी आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी UPIN देने की योजना है। पुराने कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल करते हुए उन्हें मौके की वास्तविक स्थिति से जोड़ा जाएगा। सरकार के मुताबिक इससे संपत्ति प्रबंधन के साथ भविष्य में नागरिक सेवाओं को भी ऑनलाइन और अधिक व्यवस्थित बनाने का आधार तैयार होगा।
CM साय के मार्गदर्शन में डिजिटल गवर्नेंस पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में नागरिक सेवाओं और सरकारी रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर जोर दिया जा रहा है। RDA की यह परियोजना भी इसी दिशा में प्रस्तावित की गई है, जिसमें पुराने दस्तावेजों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एकीकृत डिजिटल सिस्टम में लाने की योजना है।
परियोजना के तहत संपत्ति रजिस्टर, लेजर बुक, लेआउट नक्शे, पट्टा और लीज से संबंधित पुराने दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। इसके बाद ड्रोन से तैयार मैप और मौके पर किए गए भौतिक सत्यापन के साथ इन रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
ओपी चौधरी बोले- डिजिटलीकरण से बढ़ेगी पारदर्शिता
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ शासन नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार RDA की संपत्तियों के डिजिटलीकरण, ड्रोन सर्वे और GIS मैपिंग की पहल से प्राधिकरण के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने तथा भविष्य में नागरिकों को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने का आधार तैयार होगा।
ओपी चौधरी के मुताबिक आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार होने वाला डिजिटल रिकॉर्ड RDA की संपत्तियों और अधोसंरचना के प्रबंधन में उपयोगी साबित होगा।
हर प्रॉपर्टी की होगी अपनी डिजिटल पहचान
RDA की योजना में सबसे अहम हिस्सा UPIN है। प्रत्येक संपत्ति और भूखंड को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा। यह नंबर संबंधित संपत्ति के डिजिटल रिकॉर्ड और GIS मैप से जुड़ा रहेगा। इससे भविष्य में किसी संपत्ति से संबंधित जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
सर्वे के दौरान सिर्फ आसमान से तस्वीरें लेने तक प्रक्रिया सीमित नहीं रहेगी। प्रशिक्षित टीम डोर-टू-डोर जाकर संपत्तियों का भौतिक सत्यापन करेगी। मोबाइल एप के जरिए जियो-टैग्ड फोटो और जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी।
पुराने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का होगा मिलान
RDA के पुराने दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग और भौतिक सत्यापन से मिले डेटा को एक साथ GIS प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा।
इससे संपत्तियों की सीमा, माप, उपयोग और अन्य रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। परियोजना के तहत मौके की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध अभिलेखों के बीच अंतर की पहचान करने का भी प्रयास किया जाएगा।
नामांतरण, लीज और NOC जैसी सेवाओं को मिलेगा डिजिटल आधार
डिजिटल एसेट डेटाबेस तैयार होने के बाद इसका उपयोग भविष्य में नागरिक सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में किया जा सकेगा। नामांतरण, लीज नवीनीकरण, भवन अनुज्ञा और NOC जैसी सेवाओं को ऑनलाइन प्रक्रिया से जोड़ने के लिए यह डिजिटल डेटाबेस आधार का काम कर सकता है।
इसके अलावा सड़क, नाली, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति जैसी सार्वजनिक अधोसंरचनाओं का GIS आधारित रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा। इससे इन परिसंपत्तियों की मॉनिटरिंग और रखरखाव की योजना बनाने में सहायता मिलेगी।
छह चरणों में तैयार होगा डिजिटल एसेट डेटाबेस
RDA की परियोजना को छह चरणों में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में पुराने रिकॉर्ड और नक्शों का डिजिटलीकरण होगा। दूसरे चरण में ड्रोन से हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग की जाएगी। तीसरे चरण में डोर-टू-डोर भौतिक सत्यापन होगा।
चौथे चरण में मोबाइल एप के जरिए जियो-टैग्ड फोटो और संपत्ति संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी। पांचवें चरण में सभी डेटा को GIS प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जाएगा। छठे और अंतिम चरण में डिजिटल डेटाबेस की सुरक्षित होस्टिंग के साथ वेब आधारित एसेट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के जरिए संपत्तियों की मॉनिटरिंग की जाएगी।
RDA के पास तैयार होगा व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड
RDA के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अवनीश कुमार शरण के अनुसार इस परियोजना के जरिए पुराने अभिलेखों को डिजिटल डेटाबेस से जोड़ते हुए मौके की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। ड्रोन सर्वे, जियो-टैगिंग, भौतिक सत्यापन और GIS आधारित डेटा एकीकरण से प्राधिकरण के पास अपनी संपत्तियों और अधोसंरचनाओं का व्यापक डिजिटल एसेट डेटाबेस तैयार होगा।
RDA अध्यक्ष नंद कुमार साहू ने इसे संपत्तियों और योजनाओं के प्रबंधन को तकनीक आधारित बनाने की पहल बताया। वहीं RDA उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने नागरिकों को भविष्य में अधिक सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने को परियोजना का उद्देश्य बताया।
सर्वे टीम को सहयोग करने की अपील
RDA ने नागरिकों से अपील की है कि अधिकृत सर्वे टीम के उनके परिसर में पहुंचने पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं और सर्वे कार्य में सहयोग करें। प्राधिकरण के अनुसार अधिकृत सर्वे कर्मचारियों के पास RDA द्वारा जारी पहचान-पत्र होना अनिवार्य रहेगा।
