रायपुर। पशुपालन करने वाले परिवारों के लिए गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और ऊंट जैसे पशु सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि कमाई का बड़ा जरिया भी होते हैं। खासकर दुधारू पशु की अचानक बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से मौत होने पर परिवार की आय पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए पशुपालक पशुधन बीमा का सहारा ले सकते हैं।
प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार दे सकती है
पशुधन बीमा की खासियत यह है कि पात्र पशुपालक को कई योजनाओं में पूरा प्रीमियम अपनी जेब से नहीं देना पड़ता। राष्ट्रीय पशुधन बीमा योजना के तहत सामान्य राज्यों में पशुपालक की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी बताई गई है, जबकि बाकी 85 फीसदी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में दिया जा सकता है।
हालांकि, सब्सिडी का प्रतिशत और पात्रता राज्य तथा संबंधित योजना के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए बीमा कराने से पहले अपने राज्य में लागू नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
अलग पशुओं के लिए अलग हो सकता है बीमा कवर
बीमा की राशि सभी पशुओं के लिए समान नहीं होती। यह पशु की नस्ल, उम्र, कीमत और संबंधित योजना की शर्तों पर निर्भर करती है। अलग-अलग सरकारी योजनाओं में गाय और भैंस के लिए करीब 40 हजार से 60 हजार रुपये तक का कवर बताया गया है। वहीं भेड़ और बकरी के लिए यह राशि कुछ योजनाओं में करीब 4 हजार से 15 हजार रुपये प्रति पशु तक हो सकती है।
बीमा कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पशु का बीमा कराने के लिए उसकी सही पहचान और जरूरी दस्तावेज अहम होते हैं। पशु की टैगिंग विशेष रूप से जरूरी हो सकती है, क्योंकि क्लेम के समय इसी से बीमित पशु की पहचान की जाती है। स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र और योजना के अनुसार अन्य कागजात भी मांगे जा सकते हैं।
ध्यान दें पशुधन बीमा की शर्तें, प्रीमियम, सब्सिडी और बीमा राशि राज्य व योजना के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। पशुपालक बीमा कराने से पहले संबंधित विभाग, अधिकृत बीमा कंपनी या स्थानीय पशुपालन कार्यालय से पात्रता और नियमों की जानकारी जरूर लें। पशु की मौत होने पर क्लेम प्रक्रिया और सूचना देने की समय-सीमा का भी विशेष ध्यान रखें।
