मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि बिजली से संबंधित जिस सुनवाई का हवाला देकर निजीकरण की बात कही जा रही है, वह एक रूटीन प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी नियमित प्रक्रिया को सरकार के किसी बड़े नीतिगत फैसले के रूप में देखना उचित नहीं है।
सुनवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट
सीएम साय ने कहा कि संबंधित सुनवाई को बिजली के निजीकरण की तैयारी के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार की ओर से बिजली के निजीकरण को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी पहले भी कई मुद्दों पर दुष्प्रचार करती रही है और इस मामले में भी लोगों के बीच गलतफहमी पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसे दावों को लेकर भ्रमित न हों।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद बिजली निजीकरण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसका निजीकरण के किसी फैसले से संबंध नहीं है।
सरकार ने कहा : अफवाहों पर ध्यान न दें
सीएम साय ने कहा कि बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट है। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी मुद्दे पर केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर राय बनाने के बजाय तथ्यों को देखें और भ्रामक प्रचार से बचें।

