किसान आंदोलन के बीच CM साय का बड़ा फैसला, अब ₹425 प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा गन्ना; पुराने भुगतान पर भी राहत
रायपुर । छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गन्ना उत्पादक किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के शक्कर कारखानों में गन्ने की खरीदी 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी। इतना ही नहीं, पेराई सत्र 2025-26 में पहले खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी बढ़ी हुई दर के आधार पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस फैसले को गन्ना किसानों की मांगों और कृषि उपज के उचित मूल्य को लेकर चल रही चर्चा के बीच महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया। ऐसे समय में जब किसानों के मुद्दों को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी सवाल उठ रहे हैं, सरकार के इस ऐलान ने गन्ने के दाम और किसानों को मिलने वाले आर्थिक लाभ को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
गौरतलब है कि भारतीय किसान संघ ने 8 अक्टूबर को प्रदेश के सभी 33 जिलों में 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। किसानों ने ट्रैक्टर रैलियां निकालकर जिला मुख्यालयों में ज्ञापन सौंपे थे। आंदोलन में धान की कीमत, लंबित भुगतान, गन्ने के दाम, सिंचाई, बिजली और खाद की उपलब्धता जैसे मुद्दे उठाए गए थे। इस आंदोलन का व्यापक असर कवर्धा जिले में देखा गया जहां लगातार दो दिनों तक किसान अपनी मांगो पर अड़े रहे, और प्रमुख मार्गो पर चक्काजाम जारी रखा। गन्ना किसानों की प्रमुख मांगों में प्रति क्विंटल 150 रुपये अतिरिक्त राशि या बोनस देने, गन्ने को कृषक उन्नति योजना से जोड़ने और भुगतान समय पर करने की मांग शामिल थी। किसानों का कहना था कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद उन्हें उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री साय ने गन्ने की खरीदी 425 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है।
एक दिन पहले दीपक बैज ने उठाए थे किसानों के मुद्दे
गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच 9 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी किसानों की मांगों का मुद्दा उठाया था। बैज ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय किसान संघ की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि यदि संगठन किसानों के मुद्दों को लेकर गंभीर है, तो उसे सरकार से तत्काल समाधान की मांग करनी चाहिए। बैज ने इसी दिन बिजली संकट, स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और सड़कों के रखरखाव को लेकर भी सरकार को घेरा था।
उनके इन बयानों के बाद किसानों के मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस भी चर्चा में रही। ऐसे में 10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री द्वारा गन्ने की खरीदी का नया रेट घोषित करना महत्वपूर्ण है। एक ओर किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। सरकार के ताजा फैसले से गन्ना उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन किसान आंदोलन में उठाई गई दूसरी मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर भी नजर रहेगी।
पुराने पेराई सत्र के भुगतान पर भी मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री के निर्णय के मुताबिक, केवल आगामी खरीदी ही नहीं, बल्कि पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी 425 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ी हुई दर से किया जाएगा। इससे पिछले सत्र में गन्ना बेच चुके किसानों को भी बढ़ी हुई दर का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अन्नदाता की खुशहाली समृद्ध छत्तीसगढ़ का आधार है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी उपस्थित थे। अब बड़ा सवाल: क्या गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी के बाद किसान आंदोलन की दूसरी मांगों पर भी सरकार जल्द निर्णय लेगी? धान के लंबित भुगतान, खरीदी व्यवस्था, सिंचाई और खेती के लिए बिजली जैसे मुद्दों पर किसानों की अपेक्षाएं अब भी बनी हुई हैं।
