
भारत सरकार के खान मंत्रालय की ओर से आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की 8वीं ट्रेंच में देश के सात राज्यों के 20 ब्लॉक नीलामी के लिए शामिल किए गए हैं। इनमें 5 ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
लिथियम, ग्रेफाइट और Rare Earth की बड़ी संभावनाएं
छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, Rare Earth Elements, टंग्स्टन, वैनेडियम और गैलियम सहित कई महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाएं सामने आई हैं। कटघोरा और बस्तर क्षेत्र में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्वों की संभावनाएं हैं, जबकि बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम और गैलियम के भंडार की संभावना बताई गई है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में निकेल और क्रोमियम जैसे खनिजों की भी संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन खनिजों का महत्व केवल खनन तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल बैटरी, Energy Storage, Electronics, Drone, Defence Equipment और Advanced Manufacturing जैसे क्षेत्रों में होता है। ऐसे में इन संसाधनों का विकास भारत की Strategic Supply Chain को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
65 ब्लॉक्स की नीलामी, 4 लाख करोड़ के संभावित राजस्व का अनुमान
मुख्यमंत्री के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की जा चुकी है। इनसे करीब 4 लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की उम्मीद है। राज्य में खनिज अन्वेषण को भी गति दी गई है। पिछले ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है।
ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल से सीधे लोगों को फायदा
रोड शो में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-रेत संगवारी के जरिए प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाया जाएगा।
वहीं दंतेवाड़ा के टिन कारोबार से जुड़े आदिवासी परिवारों के लिए टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य टिन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता लाने के साथ उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
खनन के साथ पर्यावरण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खनिज संसाधनों के विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जा रहा है। सरकार के अनुसार सतत खनन के प्रयासों के बीच छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में 1.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार का जोर खनिज संसाधनों के दोहन के साथ स्थानीय समुदायों को लाभ पहुंचाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर है।
केंद्र ने निवेशकों और स्टार्टअप्स को दिया संदेश
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने Critical और Strategic Minerals में आत्मनिर्भरता को देश की आर्थिक और सामरिक शक्ति के लिए जरूरी बताया। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की अपील की।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी का वास्तविक लाभ केवल खनन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग, Value Addition और रोजगार के रूप में इसका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने खनन क्षेत्रों में आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया।
देश में 56 Critical Mineral Blocks की नीलामी पूरी
खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि देश में अब तक 88 Critical एवं Strategic Mineral Blocks की नीलामी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इनमें से 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा Lithium एवं Rare Earth Element Block से हुई।
उन्होंने कहा कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए समयबद्ध स्वीकृतियों, Milestone Based Compliance और Unified Mining Portal जैसे सुधार किए गए हैं।
Critical Minerals को लेकर छत्तीसगढ़ की बढ़ती गतिविधियां राज्य के लिए नई औद्योगिक संभावनाओं का आधार बन सकती हैं। खनिज ब्लॉक्स की नीलामी के साथ Exploration, Processing और Value Addition को बढ़ावा मिलने पर राज्य की भूमिका देश की Strategic Supply Chain में और मजबूत होने की उम्मीद है।

