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R.O. No. 13952/23
R.O. No. 13952/23

  रायपुर –  राजधानी समेत प्रदेशभर में जीवित लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित करने के मामले बढ़ रहे हैं। किसी का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हो गया तो किसी का राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। राज्यभर में ऐसी 100 से ज्यादा शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

पीड़ित खुद को जीवित साबित करने सरकारी दफ्तरों में भटक रहे हैं। भास्कर पड़ताल में सामने आया है कि संपत्ति हड़पने, वसीयतनामा बदलने, फर्जी तरीके से जमीन बेचने, जीएसटी चोरी, बैंक खातों से रकम निकालने व व्यक्तिगत फायदे के लिए भी ऐसे दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। अफसरों की लापरवाही और बिना सत्यापन रिकॉर्ड अपडेट करना भी इसकी वजह है।

चौंकाने वाली बात है कि सरकार के पास ऐसे मामलों का एकीकृत आंकड़ा नहीं है। जिला स्तर पर शिकायत मिलने के बाद जांच होती है। दस्तावेजों की पड़ताल और रिकॉर्ड सुधारने में लंबा समय लगने से कई मामले बिना ठोस कार्रवाई के खत्म हो जाते हैं। इधर दूसरी ओर एसआईआर में प्रदेश की पुरानी मतदाता सूची से 25 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए हैं।

इनमें करीब 6 लाख नाम मृत्यु के आधार पर कटे। अब कुछ जीवित मतदाता भी मृत बताकर नाम हटाने का दावा कर रहे हैं। इस मामले में राजस्व विभाग की सचिव और विशेष सचिव से फोन और एसएमएस से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

 

 

बीएलओ से नाम कटने की शिकायत करें, सत्यापन होगा

निर्वाचन आयोग के अनुसार, ऐसी शिकायत बीएलओ के पास दर्ज कराई जा सकती है। सूची से छूटे हुए नामों को जोड़ने और त्रुटियों को सुधारने के लिए बीएलओ घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे।

ये हैं तीन केस… सरकारी रिकॉर्ड में मृत, हकीकत में जिंदा…

जिंदा, फिर भी राशन बंद

रायपुर के केलकरपारा निवासी शाकरा को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर बीपीएल राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। पति की पहले ही मौत हो चुकी है। बुजुर्ग महिला रिकॉर्ड सुधरवाने सरकारी दफ्तरों में भटक रही हैं, लेकिन राहत नहीं मिली।

56 साल बाद प्रमाण पत्र

भाटापारा के धुर्राबंधा निवासी चरण की मौत रिकॉर्ड में 15 फरवरी 1970 दर्ज है, जबकि प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 को जारी हुआ। जीवित व्यक्ति का प्रमाण पत्र बनने की शिकायत राजेश अग्रवाल ने एसडीएम से की। प्रशासन जांच कर रहा है।

केवाईसी में मृत घोषित

कांकेर के चारामा निवासी हलीमा बानो को राशन कार्ड और महतारी वंदन योजना की केवाईसी कराने पर पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित किया गया है। पति के निधन के बाद अब रिकॉर्ड सुधरवाने दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।

समझिए… जीवित लोगों को मृत बताने के पीछे क्या वजहें

  • संपत्ति हड़पने, वसीयतनामा बदलने, जमीन कम कीमत पर बेचने व दस्तावेजों में हेरफेर।
  • फर्जी जीएसटी फर्म बना कार्रवाई से बचने की कोशिश
  • दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते से रकम निकालने या ट्रांसफर कराने का प्रयास।
  • व्यक्तिगत लाभ के लिए परिवार के सदस्यों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज बनवाना।
  • बिना भौतिक सत्यापन मृत्यु दर्ज करना और गलत दस्तावेज स्वीकार करना।
  • बिना सत्यापन मृत मानकर नाम हटाने के आरोप।

मृत घोषित किया तो ऐसे सुधरवाएं दस्तावेज

ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत या जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार और शहर में निगम-नगरपालिका कार्यालय में आवेदन दें। स्वयं उपस्थित होकर आधार, पहचान पत्र और जीवित होने के प्रमाण दें। जरूरत पर शपथ पत्र, बायोमेट्रिक या जनप्रतिनिधि का सत्यापन कराएं। जांच के बाद रजिस्ट्रार मृत्यु प्रविष्टि निरस्त करेगा। फर्जीवाड़े पर पुलिस में शिकायत करें। आदेश से जमीन, बैंक, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड सुधरवाएं। मतदाता सूची से नाम कटने पर बीएलओ से संपर्क करें।

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