March 8, 2026

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में धर्मांतरण के आरोप, रसोईघर से मीटिंग हॉल तक उठा विवाद — प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

IMG-20260208-WA0003

कोरबा। जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल इन दिनों एक गंभीर विवाद को लेकर चर्चा में है। सूत्रों के हवाले से सामने आए आरोपों ने अस्पताल प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में धार्मिक गतिविधियों के नाम पर योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

सूत्रों के अनुसार अस्पताल के 100 बेड वाले रसोईघर क्षेत्र में कुछ दिनों पूर्व मिशनरियों द्वारा पोस्टर लगाकर प्रचार किया गया। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें कुछ लोग आपत्ति दर्ज कराते दिखाई दे रहे हैं।

मामले में डीएनएस मैडम विल्सन का नाम चर्चा में है। आरोप है कि उनके कार्यभार संभालने के बाद से अस्पताल परिसर में धार्मिक गतिविधियां बढ़ी हैं। कुछ दिन पूर्व अस्पताल के मीटिंग हॉल में नए साल का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां प्रार्थना कराए जाने और ईसाई संस्कृति पर व्याख्यान दिए जाने की बात कही जा रही है। कार्यक्रम में उपस्थित कर्मचारियों से सामूहिक प्रार्थना कराए जाने का भी दावा किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि पीपी यूनिट ओपीडी में कार्यरत कुछ स्टाफ नर्सों के माध्यम से परेशान कर्मचारियों और मरीजों को प्रार्थना के जरिए समस्याओं से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिया जाता है। कथित रूप से कुछ लोगों को अस्पताल परिसर के पास स्थित आवास पर भी बुलाया जाता है।

कुछ कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कथित रूप से कुछ स्टाफ को सुविधा के अनुसार ओपीडी ड्यूटी दी जाती है, जिससे वे संबंधित अधिकारी के निकट रह सकें। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अस्पताल के भीतर इसको लेकर चर्चाएं तेज हैं।

एक अन्य आरोप यह भी है कि संबंधित अधिकारी के चेंबर में धार्मिक ग्रंथ उपलब्ध रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यक्तिगत आस्था प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन सरकारी संस्थान के भीतर किसी विशेष धर्म के प्रचार-प्रसार के आरोप गंभीर माने जाते हैं।

बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर कुछ संगठनों ने अस्पताल पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। वायरल वीडियो में विरोध के दृश्य होने का दावा किया जा रहा है, जिसकी सत्यता की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही संभव है।

कानूनी जानकारों के अनुसार यदि किसी सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों या कर्मचारियों पर धार्मिक प्रभाव डालने या धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के प्रमाण मिलते हैं, तो यह सेवा नियमों का उल्लंघन हो सकता है।

फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि यदि लिखित शिकायत या पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से कहा कि किसी भी सरकारी संस्थान में धार्मिक या राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है।

पूरा मामला अब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा में है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करेगा।

FB_IMG_1770226758185
Markandey Mishra

About The Author

Spread the word