भ्रष्ट राजस्व अमला का कमाल, कल हुई शिकायत, आज बन गई ऋण पुस्तिका

न्यू एक्शन ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था समाचार

कोरबा 12 अप्रैल। प्रदेश के राजस्व मंत्री के गृह जिला कोरबा के राजस्व अमला ने एक और कमाल कर दिखाया है। दर्री तहसील के पटवारी हल्का नंबर 17 गोपालपुर में पदस्थ पटवारी संजू निषाद के खिलाफ मंगलवार को रिश्वत की शिकायत हुई तो दूसरे ही दिन शिकायतकर्ता का रिकॉर्ड दुरुस्त हो गया और उसे ऋण पुस्तिका भी प्राप्त हो गई।

आपको बता दें कि दर्री तहसील के गोपालपुर पटवारी हल्का के पावर सिटी कॉलोनी में एक मकान की पिछले दिनों खरीदी बिक्री की गई। इस मकान की रजिस्ट्री और नामांतरण की भू अभिलेख शाखा की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद रिकॉर्ड दुरुस्ती करण के लिए दस्तावेज गोपालपुर के पटवारी संजू निषाद के पास पिछले महीने भेजा गया। कलेक्टर जनदर्शन में मंगलवार को की गई लिखित शिकायत के अनुसार पटवारी संजू निषाद रिकॉर्ड दुरुस्ती करण में आनाकानी कर रहा था और रिश्वत की मांग कर रहा था। रिकॉर्ड दुरुस्त करने और ऋण पुस्तिका प्रदान करने के एवज में पटवारी संजू निषाद ₹40000 की मांग कर रहा था। साथ ही वह कहता था कि रुपया देने पर एक ही दिन में काम हो जाएगा। रिश्वत नहीं देने के कारण वह कहता था कि उसके पास बहुत काम है और वह बिजी है।

इस मामले में कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत और न्यूज़ एक्शन में समाचार प्रकाशन के बाद बुधवार को कमाल हो गया। दर्री तहसील से बुधवार को शिकायतकर्ता को सूचना दी गई कि उनका राजस्व रिकॉर्ड सुधार दिया गया है और ऋण पुस्तिका भी बना दी गई है। वे तहसील कार्यालय आकर अपनी ऋण पुस्तिका प्राप्त कर लें। शिकायतकर्ता तहसील कार्यालय पहुंचा तो हाथों हाथ उन्हें ऋण पुस्तिका प्रदान कर दी गई। साथ ही उनसे लिखित में लिया गया कि उनका रिकॉर्ड दुरुस्ती करण का कार्य हो गया है और उन्हें ऋण पुस्तिका प्रदान कर दी गई है। कोरबा जिले के नागरिकों के लिए यह मामला एक नजीर की तरह है और इससे स्पष्ट हो गया है कि राजस्व अमला के भ्रष्टाचार की कलेक्टर से शिकायत करने और ऐसे मामलों का समाचार प्रकाशन कराने पर नागरिकों के रुके हुए काम अविलंब हो सकते हैं। लिहाजा आने वाले दिनों में जिले के नागरिकों को इस किस्म के भ्रष्टाचार की शिकायत करने के साथ ही समाचार पत्रों और समाचार माध्यमों में उनका प्रकाशन भी कराना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले में पटवारी संजू निषाद कोई अपवाद नहीं है। जिले में आए दिन इस तरह की शिकायतें सुनने में आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पहले जो काम एक- दो हजार रुपये में हो जाया करते थे, अब उसी काम के लिए 40- 50 हजार रुपयों की मांग की जाती है। आम शिकायत है कि जमीनों का रिकॉर्ड दुरुस्त करने से लेकर डायवर्सन और खरीदी बिक्री की अनुमति के मामलों में जमीन की कीमत के हिसाब से 40,000 से लेकर लाखों रुपयों की मांग और लेन-देन राजस्व विभाग का अमला करता है। लोगों का कहना है कि जब तक संबंधित टेबल पर अनुचित मांग की पूर्ति नहीं हो जाती तब तक लोगों को दफ्तर का चक्कर काटने के लिए बाध्य किया जाता है।

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